मुंबई। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इस हफ्ते कई अच्छी खबरें एक साथ आई हैं। एक तरफ जहां रुपया डॉलर के मुकाबले 6 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी तरफ भारत ने चौथी तिमाही में करंट अकाउंट सरप्लस** दर्ज कर सबको चौंका दिया है। इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की इकोनॉमी मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
रुपया 6 हफ्ते की ऊंचाई पर
गुरुवार को रुपये में जोरदार तेजी देखने को मिली और यह 6 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले US फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण रुपये पर दबाव था। लेकिन विदेशी बाजारों से डॉलर की बिकवाली और निर्यातकों (exporters) की मजबूत भागीदारी ने रुपये को सहारा दिया। रुपये के मजबूत होने से आयात सस्ता होता है, जिसका सीधा फायदा महंगाई कम करने में मिलता है।
करंट अकाउंट में चौंकाने वाला सरप्लस
भारत ने Q4 FY26 में $7.1 अरब (GDP का 0.7%) का करंट अकाउंट सरप्लस दर्ज किया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। आमतौर पर भारत करंट अकाउंट डेफिसिट (घाटे) में रहता है, लेकिन इस बार सरप्लस आया है। इसकी सबसे बड़ी वजह रही रेमिटेंस (विदेश से भेजी गई रकम) में 31% का उछाल, जो बढ़कर $43.5 अरब पहुंच गई, और साथ ही मजबूत सर्विसेज एक्सपोर्ट।
भारत फिर बना 6वां सबसे बड़ा शेयर बाजार
ग्लोबल रैंकिंग में भी भारत ने वापसी की है। $4.84 लाख करोड़ (ट्रिलियन) के मार्केट-कैप के साथ भारत दोबारा दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। यह तब हुआ जब साउथ कोरिया का $5 ट्रिलियन वैल्यूएशन एक हफ्ते में करीब 10% गिर गया।
आगे क्या?
जानकारों का मानना है कि रुपये की मजबूती, करंट अकाउंट सरप्लस और US-Iran शांति से सस्ते होते कच्चे तेल का मिला-जुला असर भारत में महंगाई को काबू में रखने और बाजार की तेजी को बनाए रखने में मदद करेगा। फिलहाल भारतीय इकोनॉमी के मोर्चे पर संकेत मजबूत बने हुए हैं।

