पुणे. लोहागढ़ किले पर कारोबारी केतन अग्रवाल (25) की मौत के मामले में चल रही अटकलों पर पुलिस जांच ने काफी हद तक विराम लगा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस पूछताछ में यह सामने आया है कि 18 जून की कथित वारदात में मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति सीधे तौर पर मौके पर शामिल नहीं था**। यानी जांच अब मुख्य रूप से इन्हीं दो आरोपियों और उनके खिलाफ जुटाए जा रहे डिजिटल सबूतों पर केंद्रित है।
‘तीसरे शख्स’ की अटकलों पर विराम
पिछले हफ्तों में केस में कई नाम और एंगल चर्चा में आए थे — बीड के एक युवक (चेतन के कथित पूर्व सहपाठी) से पूछताछ की खबरें भी सामने आई थीं, जिसे कथित तौर पर साजिश की जानकारी थी। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वारदात को अंजाम देने में सीधे तौर पर सिर्फ दो ही लोग थे। किसी को साजिश की जानकारी होना और वारदात में सीधे शामिल होना — दोनों कानूनी रूप से अलग बातें हैं।
(यह जानकारी पुलिस सूत्रों/रिपोर्ट्स के हवाले से है; अंतिम तस्वीर चार्जशीट में ही साफ होगी।)
अब पूरी लड़ाई डिजिटल-फॉरेंसिक सबूतों की
चूंकि केस में न कोई चश्मदीद है, न सीधा वीडियो फुटेज — पुणे ग्रामीण पुलिस का पूरा दारोमदार अब डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों पर है:
- कॉल रिकॉर्ड, WhatsApp/Snapchat चैट, कथित कोड वर्ड
- मोबाइल लोकेशन हिस्ट्री और CCTV फुटेज
- पैसों के लेनदेन की जांच
पुलिस बेहद सावधानी से ऐसी चार्जशीट तैयार कर रही है जो अदालत की कानूनी कसौटी पर टिक सके — क्योंकि सीधे सबूतों की कमी में सोनम रघुवंशी केस की तरह जमानत मिलने की आशंका बनी हुई है। बचाव पक्ष पहले ही केस को ‘हादसा’ बताकर चुनौती दे रहा है।
मौजूदा स्थिति
दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं (17 जुलाई को हिरासत 14 दिन और बढ़ी, जुलाई-अंत तक)। अब सबकी नजर पुलिस की चार्जशीट (गिरफ्तारी से 90-दिन की समयसीमा) और बचाव पक्ष की संभावित जमानत अर्जी पर है।
(मामला अदालत में विचाराधीन है। सभी दावे पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं; कोई भी आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है।)
Sources: Patrika — पुलिस जांच | Patrika — चार्जशीट/जमानत

