नई दिल्ली/द्रास. आज पूरा देश कारगिल विजय दिवस पर अपने वीर सपूतों को नमन कर रहा है। 26 जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिन 1999 की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब भारतीय सैनिकों ने कारगिल की बर्फीली चोटियों को दुश्मन के कब्जे से वापस छीना था। इस बार यह गौरवशाली विजय के 27 वर्ष** पूरे होने का अवसर है — पूरे देश में गर्व, कृतज्ञता और श्रद्धांजलि का माहौल है।
1999 की जंग: ऑपरेशन विजय की कहानी
- मई 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर कारगिल की ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था
- मकसद था — कश्मीर और लद्दाख की कड़ी को तोड़ना और सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात सैनिकों को अलग-थलग करना
- भारत ने ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत जवाबी कार्रवाई की; भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ और नौसेना ने पूरी तैनाती से साथ दिया
- रणनीति साफ थी — रोको, खदेड़ो और वापसी रोको (contain, evict and deny) — वह भी बिना LoC पार किए
- करीब दो महीने की भीषण लड़ाई के बाद भारत ने चोटियां वापस जीत लीं; सैकड़ों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया
राजनाथ सिंह ने रवाना की ‘शौर्य विजय यात्रा’
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक खास पहल की शुरुआत की:
- नेशनल वॉर मेमोरियल (दिल्ली) से द्रास (कारगिल) तक की 13 दिन की ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाई
- यह 1,900 किमी लंबी मोटरसाइकिल यात्रा शहीदों को श्रद्धांजलि और देशभर में शौर्य की भावना जगाने का प्रतीक है
- देश के अलग-अलग युद्ध स्मारकों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम, स्कूलों-कॉलेजों में शहीदों को याद किया गया
बदलती भारतीय सेना: 27 साल का सफर
कारगिल के बाद के 27 वर्षों में भारतीय सेना ने खुद को तेजी से आधुनिक और सशक्त बनाया है — बेहतर हथियार, निगरानी तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और ऊंचाई वाले युद्ध की तैयारियों में बड़ा बदलाव आया है। हाल में DRDO के ‘कुशा’ जैसे स्वदेशी वायु रक्षा सिस्टम इसी आत्मनिर्भर ताकत की मिसाल हैं। कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक जीत का जश्न नहीं, बल्कि उन वीरों के बलिदान को याद करने और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा देने का दिन है। ‘ये दिल मांगे मोर’ — कैप्टन विक्रम बत्रा का यह जज्बा आज भी हर भारतीय के दिल में गूंजता है।
Sources: IANS Live | Vajiram & Ravi

