नई दिल्ली. भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित मासिक कालाष्टमी आज, 5 अगस्त को मनाई जा रही है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है, और सावन मास में पड़ने से आज का दिन और भी खास है — शिव भक्ति के इस महीने में काल भैरव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि काल भैरव की पूजा से भय, संकट, रोग और नकारात्मक शक्तियों** से मुक्ति मिलती है।
कौन हैं काल भैरव
- काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र (उग्र) स्वरूप माना जाता है
- इन्हें समय (काल) और न्याय का देवता भी कहा जाता है
- काशी (वाराणसी) में काल भैरव को नगर का कोतवाल माना जाता है
- मान्यता है कि इनकी कृपा से भय और शत्रु बाधा दूर होती है और सुरक्षा मिलती है
पूजा विधि
- प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
- भगवान शिव, माता पार्वती के साथ काल भैरव की पूजा करें
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल, उड़द और गुड़ अर्पित करें
- ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें, काल भैरव चालीसा पढ़ें
- कुछ श्रद्धालु इस दिन पितरों (पूर्वजों) के निमित्त भी पूजा करते हैं
- रात्रि में पूजा का विशेष महत्व, क्योंकि काल भैरव की आराधना रात्रि में शुभ मानी जाती है
कालाष्टमी का संदेश
कालाष्टमी सिर्फ भय और संकट से मुक्ति का व्रत नहीं, बल्कि अनुशासन, न्याय और समय के महत्व का भी प्रतीक है। काल भैरव को समय का स्वामी माना गया है — इसलिए यह व्रत हमें समय की कद्र करने और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सावन में शिव के साथ उनके इस रूप की आराधना से भक्तों को विशेष कृपा की प्राप्ति होती है। आज कुत्तों (काल भैरव का वाहन) को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु आज व्रत, पूजा और दान के जरिए काल भैरव की कृपा की कामना करेंगे।
(यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है।)
Sources: Dainik Jagran | Rudraksha Ratna

