धर्म डेस्क. सावन मास में पड़ने वाली विनायक चतुर्थी आज, 16 अगस्त 2026 (रविवार) को मनाई जा रही है। हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान गणेश** को समर्पित है। इस बार यह पावन तिथि सावन के महीने में पड़ रही है, इसलिए कई भक्त इसे अपने चल रहे सावन व्रत के साथ जोड़कर मना रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन गणपति की पूजा से बुद्धि, समृद्धि और कार्यों में सफलता मिलती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
- चतुर्थी तिथि आरंभ: 15 अगस्त शाम 5:29 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 16 अगस्त शाम 4:53 बजे
- पूजा का सबसे शुभ समय: मध्याह्न काल (दोपहर) — इसे भगवान गणेश का जन्म समय माना जाता है
- अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:59 से 12:52 तक शुभ रहेगा
व्रत और पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें
- भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर दूर्वा, मोदक, लड्डू और सिंदूर अर्पित करें
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें
- गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है
- दिनभर व्रत रखकर शाम को पूजा के बाद फलाहार करें
चंद्रमा न देखने की परंपरा
विनायक चतुर्थी से जुड़ी एक खास और कम प्रचलित परंपरा है — इस दिन चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक (झूठे आरोप) का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भक्त इस दिन चंद्र दर्शन से परहेज करते हैं।
महत्व
विनायक चतुर्थी को विशेष रूप से नए काम, यात्रा या महत्वपूर्ण पारिवारिक फैसलों से पहले मनाया जाता है, ताकि विघ्नहर्ता गणेश की कृपा से सभी बाधाएं दूर हों। सावन में इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह शिव-परिवार की भक्ति का महीना है। भक्तों से अपील है कि श्रद्धा और स्वच्छता के साथ गणपति की पूजा करें।
(यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। मुहूर्त स्थान अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।)
Sources: Sanatana Journey | mPanchang

