बेंगलुरु। भारतीय वायुसेना के लिए बन रहे स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A के प्रोडक्शन को रफ्तार देने के लिए अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने 3 और F404-IN20 इंजन भेजे** हैं। इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को डिलीवरी में हो रही देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
इंजन ही बना सबसे बड़ी अड़चन
- पिछले दो साल से तेजस Mk1A प्रोग्राम की सबसे बड़ी चुनौती GE के F404-IN20 इंजन की सप्लाई में देरी रही है — यह इंजन इस सिंगल-इंजन फाइटर जेट का सबसे अहम पुर्जा है।
- GE Aerospace के पास कुल 99 F404-IN20 इंजन सप्लाई करने का ठेका है।
- कंपनी का लक्ष्य दिसंबर तक कुल 22 इंजन भेजने का है, जिससे HAL अपनी वायुसेना को डिलीवरी शुरू कर सके।
HAL का उत्पादन लक्ष्य
HAL के CMD रवि कोटा ने कहा है कि कंपनी हर साल 24 विमान बनाने के स्थिर उत्पादन लक्ष्य तक पहुंचने पर काम कर रही है, हालांकि अभी वायुसेना की संतुष्टि के स्तर तक पहुंचना बाकी है।
कितना बड़ा है ऑर्डर
| डील | साल | कीमत |
|——|—–|——-|
| 83 तेजस Mk1A | 2021 | ~₹46,000 करोड़ |
| 97 अतिरिक्त तेजस Mk1A | सितंबर 2025 | ~₹62,370 करोड़ |
कुल मिलाकर वायुसेना ने 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है — भारत के लड़ाकू बेड़े के आधुनिकीकरण का सबसे बड़ा स्वदेशी कार्यक्रम।
क्यों अहम है यह अपडेट
पुराने मिग-21 बेड़े की रिटायरमेंट के बाद वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या घट रही है, ऐसे में तेजस Mk1A की समय पर डिलीवरी वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी के लिए बेहद जरूरी है। इंजन सप्लाई में सुधार से उम्मीद है कि आने वाले महीनों में डिलीवरी रफ्तार पकड़ेगी।
Sources: AajTak Defence | Amar Ujala

