बेंगलुरु.** भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का अगला बड़ा लक्ष्य चंद्रयान-4 मिशन है, जिसे केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने पुष्टि की है कि यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से मिट्टी के नमूने लेकर धरती पर वापस लाएगा, और इसे 2027-28 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मिशन का उद्देश्य
चंद्रयान-4, चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत का पहला “सैंपल-रिटर्न” चंद्र मिशन होगा। इसका मकसद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र से वैज्ञानिक नमूने इकट्ठा कर उनका धरती पर विस्तृत अध्ययन करना है, जिससे चंद्रमा की संरचना और पानी की मौजूदगी को लेकर नई जानकारी मिल सकती है।
तैयारी में जुटे वैज्ञानिक
पिछले महीने बेंगलुरु में ISRO के “लैबोरेटरी फॉर इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स सिस्टम्स” में चंद्रयान मिशनों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था, जिसमें 45 से ज्यादा संस्थानों के लगभग 150 वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें चंद्रमा के वैज्ञानिक अन्वेषण को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
आगे की बड़ी योजनाएं
ISRO की नजर सिर्फ चंद्रयान-4 तक सीमित नहीं है। एजेंसी 2027 तक पहली भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने पर भी काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने ISRO को 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना बनाने का निर्देश भी दिया है।
इस फिस्कल ईयर में सात और लॉन्च
ISRO ने इस वित्त वर्ष में सात और रॉकेट लॉन्च का लक्ष्य रखा है, जिससे भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
Sources: News On Air | Deccan Herald

