नई दिल्ली.** केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के स्पेस मिशनों को नई ताकत देने वाला बड़ा फायदा साबित होगा। उनके मुताबिक, ह्यूमन-लेड इंटेलिजेंस को न्यूक्लियर और स्पेस प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिए AI का बेहतरीन इस्तेमाल करना होगा।
स्पेस इकॉनॉमी में बड़ी ग्रोथ का अनुमान
मंत्री जितेंद्र सिंह के मुताबिक, भारत की स्पेस इकॉनॉमी इस समय करीब $9 अरब की है, जो अगले 7 से 8 साल में $40-45 अरब तक पहुंच सकती है। यह ग्रोथ प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी, नई तकनीकों के इस्तेमाल और सरकार की नीतियों के चलते संभव होने की उम्मीद है।
गगनयान मिशन पर बड़ा अपडेट
मंत्री ने बताया कि गगनयान कार्यक्रम के तहत पहला अनक्रूड (बिना क्रू के) प्रयोगात्मक मिशन, जिसमें ह्यूमनॉइड रोबोट “व्योममित्र” शामिल होगा, 2026 की चौथी तिमाही में लॉन्च किया जाना तय है। इस मिशन का मकसद ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम के लिए विकसित की जा रही तकनीकों का परीक्षण करना है।
प्राइवेट सेक्टर के लिए खुले दरवाजे
मंत्री ने यह भी कहा कि स्पेस सेक्टर को प्राइवेट खिलाड़ियों के लिए खोलने से युवा वैज्ञानिकों और टेक्निकल टैलेंट के लिए नए मौके पैदा हुए हैं, जिससे टैलेंट के विदेश जाने (ब्रेन ड्रेन) की समस्या भी कम हुई है। भारत-फ्रांस के बीच स्पेस और AI को लेकर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर भी हाल में बातचीत हुई है।
आगे की राह
सरकार का मानना है कि AI, स्पेस और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में भारत आने वाले वर्षों में औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व कर सकता है। चंद्रयान-4 जैसे मिशनों के साथ-साथ गगनयान का यह अपडेट भारत के स्पेस प्रोग्राम में तेजी से हो रही प्रगति को दर्शाता है।
Sources: Whatfinger | Punjab Kesari English

