नई दिल्ली. कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG (तरल प्राकृतिक गैस) हब में हुए भीषण धमाके में मारे गए 12 भारतीय नागरिकों के शवों को वतन लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक कतर प्रशासन के साथ मिलकर पहचान और शव वापसी का काम चल रहा है, और अब तक 12 में से 4 पार्थिव शरीर भारत** लाए जा चुके हैं। 21 जून को हुए इस हादसे में कुल 13 लोगों की जान गई थी, जिनमें 12 भारतीय थे, जबकि 66 लोग घायल हुए।
कैसे हुआ हादसा
- धमाका बरजान गैस प्रोसेसिंग प्लांट में उस वक्त हुआ, जब मेंटेनेंस के बाद प्रोडक्शन दोबारा शुरू करने का काम चल रहा था।
- कतर के ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने इसे तकनीकी हादसा बताते हुए किसी साजिश (sabotage) से इनकार किया।
- रास लफान दुनिया की करीब 20% LNG सप्लाई का केंद्र है; अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि हादसे से एक्सपोर्ट या पर्यावरण पर असर नहीं पड़ेगा।
- मारे गए सभी लोग विदेशी कामगार थे — भारतीयों के अलावा पाकिस्तानी, नेपाली, बांग्लादेशी, केन्याई और अन्य देशों के नागरिक भी घायलों में शामिल रहे।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि भारतीय दूतावास पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद दे रहा है। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि दूतावास कतर के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और शवों की पहचान व वापसी प्राथमिकता पर है। मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे और बीमा क्लेम का मुद्दा भी उठ रहा है।
खाड़ी में भारतीय श्रमिकों का बड़ा सवाल
यह त्रासदी एक बार फिर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है। खाड़ी की एनर्जी और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में लाखों भारतीय कामगार हैं, जो अक्सर जोखिमभरी परिस्थितियों में काम करते हैं। रास लफान हादसे ने वर्कप्लेस सेफ्टी और प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है।
Sources: Orissa Post | Wikipedia

