मॉस्को/कीव. रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर पड़ता दिख रहा है। यूक्रेन ने रूस के काला सागर बंदरगाह शहर नोवोरोसिस्क (Novorossiysk) पर बड़ा हमला किया, जिसमें एक नौसैनिक अड्डे पर युद्धपोतों को निशाना बनाया गया और दो बड़े अनाज (grain) टर्मिनलों को काम रोकना पड़ा। हमले में 8 साल के एक बच्चे समेत कम से कम 2 लोगों की मौत** हो गई। चूंकि रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है, इस हमले से वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है।
हमले का असर
- नोवोरोसिस्क के दो प्रमुख अनाज टर्मिनल ठप — निर्यात प्रभावित
- शिकागो गेहूं वायदा (wheat futures) करीब 3% चढ़ा — वैश्विक कीमतों में उछाल
- रूस से गेहूं आपूर्ति में रुकावट का डर, जिससे दुनियाभर में खाद्य महंगाई की चिंता
युद्धविराम पर रूस का सख्त रुख
इस बीच शांति की उम्मीदों को झटका लगा है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ कहा कि यूक्रेन में कोई युद्धविराम (ceasefire) नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मॉस्को की मौजूदा मोर्चे पर सैन्य अभियान रोकने की कोई मंशा नहीं है। यानी निकट भविष्य में संघर्ष थमने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
भारत और दुनिया पर असर
रूस-यूक्रेन दोनों बड़े अनाज निर्यातक देश हैं, इसलिए इस क्षेत्र में तनाव का असर वैश्विक खाद्य कीमतों पर सीधा पड़ता है। गेहूं के दाम चढ़ने से आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ती है। हालांकि भारत अपनी घरेलू जरूरतों के लिए काफी हद तक आत्मनिर्भर है, फिर भी वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर व्यापक स्तर पर महसूस किया जाता है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि यह तनाव कहां तक जाता है।
(यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)
Sources: Pravda EN | Wikipedia

