नई दिल्ली. भारत का निजी (प्राइवेट) स्पेस सेक्टर तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। PM मोदी द्वारा तीन साल पहले निजी कंपनियों को स्पेसपोर्ट, रॉकेट लॉन्च और रिमोट-सेंसिंग डेटा बेचने की अनुमति देने के बाद अब इसके नतीजे दिखने लगे हैं। देश का पहला स्पेस यूनिकॉर्न** लॉन्च के लिए तैयार है और कई स्टार्टअप एडवांस्ड अर्थ-इमेजिंग और ऑल-वेदर सैटेलाइट बना रहे हैं।
Skyroot Aerospace — पहला स्पेस यूनिकॉर्न
हैदराबाद की Skyroot Aerospace भारत की पहली स्पेस स्टार्टअप है जिसका वैल्यूएशन $1 अरब के पार पहुंचा। कंपनी ने GIC और BlackRock जैसे बड़े निवेशकों से फंडिंग जुटाई है और इसी महीने अपने Vikram-1 ऑर्बिटल रॉकेट की पहली उड़ान भरने की तैयारी में है। यह भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा माइलस्टोन होगा।
GalaxEye — देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सैटेलाइट
बेंगलुरु की सैटेलाइट कंपनी GalaxEye अपने पहले Mission Drishti सैटेलाइट (175+ किलो) को लॉन्च करने जा रही है, जो भारत का सबसे बड़ा निजी सैटेलाइट होगा। कंपनी का दावा है कि 2026 अर्थ ऑब्जर्वेशन (पृथ्वी की निगरानी) की संभावनाओं को नए सिरे से परिभाषित करेगा।
400+ स्टार्टअप, पर चुनौतियां भी
- देश में इस समय करीब 400 स्पेस स्टार्टअप IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रोत्साहन एवं प्राधिकरण केंद्र) के साथ रजिस्टर्ड हैं।
- सबसे बड़ी चुनौती ISRO के बाहर लॉन्च क्षमता की कमी है। खुद ISRO को हाल में झटका लगा, जब उसके भरोसेमंद PSLV रॉकेट ने बीते एक साल में दो बार पेलोड तैनात करने में विफलता झेली।
- फिर भी निजी निवेश और नई कंपनियों का उभार भारत के स्पेस सेक्टर को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहा है।
Sources: Business Standard | The Core

