नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दुनिया में भारत तेजी से बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है। देश का स्पेस सेक्टर अब करीब $44 अरब के अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। अब यह सफर सिर्फ ISRO तक सीमित नहीं रहा — निजी स्पेस स्टार्टअप्स** भी इस क्रांति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
स्टार्टअप्स की धूम
भारत के युवा स्पेस स्टार्टअप्स लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं:
- Digantara (स्पेस सर्विलांस स्टार्टअप) ने ग्लोबल विस्तार और नए सैटेलाइट लॉन्च के लिए $50 मिलियन जुटाए
- हैदराबाद की TakeMe2Space ने 14 किलो का CubeSat ‘MOI-1’ बनाया, जो अंतरिक्ष में ही AI से Earth observation डेटा प्रोसेस करेगा — भारत की पहली AI-पावर्ड ऑर्बिटल इमेज लैब
- EON Space Labs ने अपना मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग पेलोड ‘MIRA’ जनवरी 2026 में ISRO के PSLV-C62 मिशन से अंतरिक्ष में भेजा
ISRO के बड़े कदम
ISRO भी 2026 में लगातार नए कीर्तिमान बना रहा है:
- LVM3-M6 मिशन के जरिए ISRO ने अपने इतिहास का सबसे भारी कमर्शियल पेलोड (AST SpaceMobile का BlueBird Block-2 सैटेलाइट) लॉन्च किया
- ISRO ने छात्रों के लिए Indian Space Hackathon 2026 शुरू किया है, जिसमें AI, क्लाइमेट मॉडलिंग, सैटेलाइट इमेजरी और चंद्र अन्वेषण जैसे 15 चैलेंज हैं (आवेदन 1 जुलाई तक)
क्यों अहम है यह बदलाव?
कुछ साल पहले तक भारत का स्पेस प्रोग्राम लगभग पूरी तरह सरकारी था। लेकिन अब प्राइवेट प्लेयर्स, फंडिंग और AI तकनीक के दम पर भारत ग्लोबल स्पेस इकोनॉमी में बड़ा हिस्सा हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। इससे न सिर्फ रोजगार के नए अवसर बनेंगे, बल्कि भारत सैटेलाइट और स्पेस सर्विसेज का बड़ा निर्यातक भी बन सकता है।

