पुणे. लोहागढ़ किले से गिरकर हुई कारोबारी केतन अग्रवाल (26) की मौत के मामले में अब लड़ाई अदालत में तेज होती दिख रही है। पुलिस जिसे सुनियोजित हत्या बता रही है, उस थ्योरी को बचाव पक्ष ने सीधी चुनौती देनी शुरू कर दी है। आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की न्यायिक हिरासत 16 जुलाई* को खत्म हो रही है — यानी गुरुवार को इस हाई-प्रोफाइल केस में अहम सुनवाई होगी। (नोट: मामला विचाराधीन है — सभी दावे पुलिस और पक्षकारों के हैं, अदालत का फैसला आना बाकी है।)
बचाव पक्ष के तीखे सवाल
चेतन चौधरी के वकील एडवोकेट राधिकेश उत्तरवार ने अदालत में दलील दी कि जांच अब तक उनके मुवक्किल की कथित भूमिका को स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर पाई है। वहीं सिया गोयल के वकील का कहना है कि उनकी मुवक्किल को अपराध से जोड़ने वाला कोई चश्मदीद गवाह या ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
पूरा केस परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर टिका
कानूनी जानकारों के मुताबिक इस केस की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह लगभग पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्य (circumstantial evidence) पर टिका है — CCTV फुटेज, फोन रिकॉर्ड, आरोपियों की कथित मुलाकातें और हत्या से पहले की कथित नाकाम कोशिश। बचाव पक्ष इस बात पर भी जोर दे रहा है कि पुलिस हिरासत में आरोपी का कहा गया कोई भी बयान अपने आप अदालत में सबूत नहीं माना जा सकता।
पुलिस का दावा बरकरार
पुणे ग्रामीण पुलिस का दावा है कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर केतन की मौत हादसा नहीं, बल्कि मंगेतर सिया और उसके कथित प्रेमी चेतन की करीब 7 महीने की साजिश का नतीजा थी। पुलिस अब तक क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन, गेट एनालिसिस, डिलीट किए गए चैट और कोड-वर्ड्स जैसे सबूतों के आधार पर केस मजबूत करने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट पर सबकी नजर रहेगी — पर फिलहाल 16 जुलाई की सुनवाई तय करेगी कि आरोपियों की हिरासत आगे बढ़ती है या नहीं।

