पुरी (ओडिशा). भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा आज गुरुवार, 16 जुलाई से शुरू हो रही है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के इस पावन अवसर पर पुरी में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु** उमड़ पड़े हैं। तीनों देवताओं के विशाल रथ ग्रैंड रोड (बड़ा डांडा) पर तैयार खड़े हैं और शुभ मुहूर्त में रथ खींचने की रस्म शुरू होगी।
सोने की झाड़ू से ‘छेरा पहरा’
रथ यात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति महाराज सोने की झाड़ू से रथों के मार्ग की सफाई करने की पारंपरिक ‘छेरा पहरा’ रस्म निभाएंगे। यह रस्म संदेश देती है कि भगवान के आगे राजा भी एक सेवक है।
तीनों रथों की खास बातें:
- नंदीघोष — भगवान जगन्नाथ का रथ
- तालध्वज — बलभद्र जी का रथ
- दर्पदलन — देवी सुभद्रा का रथ
रथ यात्रा में तीनों देवता श्रीमंदिर से करीब 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर (मौसी के घर) जाते हैं, जहां वे करीब एक सप्ताह रहेंगे। इसके बाद बहुड़ा यात्रा (वापसी यात्रा) होगी।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुरी जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक तैयारी की है:
- सुरक्षा के लिए हजारों जवान तैनात, पूरे शहर में CCTV निगरानी
- उमस भरी गर्मी को देखते हुए जगह-जगह पीने के पानी और मेडिकल हेल्प की व्यवस्था
- ट्रैफिक के लिए विशेष रूट प्लान, स्पेशल ट्रेनें और बसें
- पुरी सांसद संबित पात्रा ने यात्रा से पहले सत्यबादी ओवरब्रिज समेत तैयारियों का निरीक्षण किया
ज्योतिषीय संयोग भी खास
इस बार रथ यात्रा का दिन ज्योतिषीय रूप से भी खास है — आज ही रात सूर्य मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। मान्यता है कि रथ यात्रा के दिन रथ खींचने या दर्शन मात्र से पुण्य फल मिलता है। ओडिशा के अलावा अहमदाबाद, कोलकाता, दिल्ली समेत देशभर के इस्कॉन मंदिरों में भी आज रथ यात्रा निकाली जा रही है।
Sources: Republic Bharat | Webdunia | The Sootr

