नई दिल्ली. मानसून सत्र के पहले ही दिन आज राजधानी में सड़क से संसद तक सियासी तपिश चरम पर है। Cockroach Janta Party (CJP) का प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च आज है, पर दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी है। जंतर-मंतर और आसपास पहले ही करीब 20,000 समर्थक** जुट चुके हैं, और माहौल तनावपूर्ण है।
New Delhi जिले में धारा 163 लागू
पुलिस ने मार्च रोकने के लिए New Delhi जिले में BNSS की धारा 163 (पुरानी धारा 144 जैसी) लागू कर दी है — जिसके तहत:
- किसी भी जुलूस, प्रदर्शन या मार्च पर रोक
- पांच या अधिक लोगों के जमावड़े पर पाबंदी
- संसद और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम, भारी पुलिस बल तैनात
इसके बावजूद CJP संस्थापक अभिजीत डिपके समर्थकों को शांतिपूर्ण मार्च के लिए तैयार कर रहे हैं। मार्च की मांग वही है — NEET पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
वांगचुक अस्पताल से भी अनशन पर अड़े
आंदोलन के चेहरे सोनम वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं (18 जुलाई को जंतर-मंतर से ले जाए गए)। ताजा मेडिकल अपडेट के मुताबिक:
- वांगचुक होश में और हेमोडायनैमिकली स्थिर हैं — पल्स, BP, ऑक्सीजन सामान्य सीमा में
- पर 21 दिन के अनशन के बाद डिहाइड्रेशन के संकेत; डॉक्टरों (और एक स्वतंत्र AIIMS विशेषज्ञ) ने तुरंत IV/ORS फ्लूइड की सलाह दी
- वांगचुक ने बार-बार समझाने के बावजूद IV फ्लूइड, ORS और दवा लेने से इनकार किया; परिवार ने भी अब तक इलाज की सहमति नहीं दी
- CJP और वांगचुक की पत्नी का आरोप — उन्हें अस्पताल में हिरासत में रखा जा रहा है
अब आगे क्या: मार्च होगा या टकराव?
बड़ा सवाल यही है। इजाजत न मिलने और धारा 163 के बीच अगर CJP मार्च पर अड़ी रही तो पुलिस से टकराव और हिरासत के हालात बन सकते हैं। दूसरी ओर संसद के भीतर विपक्ष NEET का मुद्दा उठाने की तैयारी में है — यानी आंदोलन को सदन तक पहुंचाने की कोशिश। AAP, SP, UBT, TMC, वाम दल, RJD पहले ही समर्थन में हैं और सोनिया गांधी ने भी कांग्रेस से समर्थन को कहा है। 30 दिन पुराना यह आंदोलन आज अपने सबसे बड़े इम्तिहान पर है। सरकार की ओर से मांगों पर अब तक कोई सार्वजनिक जवाब नहीं आया है।
(मांगें और आरोप प्रदर्शनकारियों/CJP/परिजनों के हैं; पुलिस कार्रवाई का आधार कानून-व्यवस्था; सेहत संबंधी जानकारी अस्पताल/डॉक्टरों के हवाले से। घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है।)
Sources: The Week | IBTimes | ETV Bharat

