बीड। मराठा आरक्षण आंदोलन में एक बड़ा मोड़ आया है। मुंबई की ओर पैदल मार्च के दौरान तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ने के बाद कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने 20वें दिन अपना अनशन खत्म कर दिया। हालांकि उन्होंने साफ किया है कि आंदोलन थमेगा नहीं — उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को मांगें पूरी करने के लिए 3 महीने की मोहलत** दी है।
तबीयत बिगड़ने की वजह
- बीड जिले के पाटोदा में मार्च के दौरान जरांगे की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत इलाज कराने की सलाह दी।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने सलाइन और पानी लेने से भी इनकार कर दिया था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
- मुंबई रवाना होने से पहले भावुक होकर उन्होंने कहा था — “यह मेरी आखिरी मुलाकात हो सकती है” — जिससे समर्थकों में चिंता बढ़ गई थी।
मार्च का सफर अधूरा रहा
जरांगे बिना पुलिस अनुमति के जालना से मुंबई के आजाद मैदान के लिए निकले थे। तय कार्यक्रम के मुताबिक मार्च 15 सितंबर को पाटोदा (बीड), 16 सितंबर को श्रीगोंदा, 17 सितंबर को हडपसर (पुणे) होते हुए 19 सितंबर को मुंबई पहुंचने वाला था। लेकिन तबीयत बिगड़ने से यह सफर बीच में ही रुक गया।
गौरतलब है कि गणेशोत्सव और सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं दी थी।
सरकार को 3 महीने की चेतावनी
अनशन खत्म करते हुए जरांगे ने कहा कि वे सरकार को मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाणपत्र और OBC आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए 3 महीने का समय दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस दौरान ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।
आगे क्या
फिलहाल जरांगे का इलाज चल रहा है, और स्वास्थ्य लाभ के बाद वे आगे की रणनीति तय करेंगे। महाराष्ट्र सरकार पर अब अगले 3 महीनों में ठोस कदम उठाने का दबाव बना रहेगा, क्योंकि मराठा समुदाय के बीच इस मुद्दे को लेकर भावनाएं अब भी गहरी हैं।
Sources: AajTak | Navbharat Live

