नई दिल्ली. भारत के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए अच्छी खबर है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने तीन स्वदेशी बायोमेडिकल तकनीकें देश की प्रमुख दवा और वैक्सीन कंपनियों को विकास, निर्माण और व्यावसायीकरण के लिए ट्रांसफर (लाइसेंस) की हैं। इसका मकसद है — सरकारी फंड से हुई रिसर्च को आम लोगों के लिए सस्ते और सुलभ इलाज** में बदलना।
सर्वाइकल कैंसर की नई दवा सबसे अहम
तीन तकनीकों में सबसे चर्चित है SHetA2 — यह सर्वाइकल कैंसर (Cervical Intraepithelial Neoplasia/CIN) के इलाज के लिए एक नई anti-HPV थेराप्यूटिक दवा है। इसे Emcure Pharmaceuticals को लाइसेंस किया गया है।
- सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में सबसे आम कैंसर में से एक है
- अधिकतर मामले HPV (Human Papillomavirus) संक्रमण से जुड़े होते हैं
- एक स्वदेशी, किफायती इलाज विकल्प लाखों महिलाओं के लिए राहत बन सकता है
बाकी दो तकनीकें भी कैंसर और संक्रामक रोगों के इलाज से जुड़ी हैं, जिन्हें अन्य भारतीय कंपनियों को दिया गया है।
क्यों अहम है यह कदम
ICMR के इस कदम को भारत के बायोमेडिकल इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है:
- लैब से बाजार तक का सफर तेज होगा — रिसर्च अब जल्दी उत्पाद में बदलेगी
- विदेशी दवाओं पर निर्भरता घटेगी, मेक इन इंडिया को बल
- मरीजों के लिए इलाज सस्ता और सुलभ होगा
- घरेलू फार्मा और वैक्सीन इंडस्ट्री को नई तकनीकों का फायदा
बड़ी तस्वीर: आत्मनिर्भर हेल्थकेयर की ओर
यह ट्रांसफर भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सार्वजनिक रूप से फंडेड रिसर्च को आत्मनिर्भर हेल्थकेयर समाधानों में बदला जा रहा है। हाल के वर्षों में स्वदेशी वैक्सीन और दवाओं (जैसे डेंगू वैक्सीन के ट्रायल) पर ICMR का फोकस बढ़ा है। जानकारों के मुताबिक अगर SHetA2 जैसी दवाएं ट्रायल के अगले चरण पार कर लेती हैं, तो यह महिलाओं की सेहत के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
Sources: IANS Live

