मुंबई. रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को अपनी मौद्रिक नीति का बड़ा फैसला सुनाया — रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा गया है और RBI ने अपना न्यूट्रल (तटस्थ) रुख भी कायम रखा है। गवर्नर संजय मल्होत्रा** ने सुबह 10 बजे यह फैसला घोषित किया। यह फैसला बाजार और जानकारों की उम्मीद के मुताबिक ही रहा। इसके बाद दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।
आम आदमी के लिए क्या मायने
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है — इसका सीधा असर आपके लोन और EMI पर पड़ता है:
- दर बरकरार रहने का मतलब — होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
- न दर घटी, न बढ़ी — यानी कर्ज न सस्ता हुआ, न महंगा
- रेपो रेट जून 2026 से लगातार 5.25% पर बना हुआ है
RBI का सतर्क रुख: महंगाई बनाम ग्रोथ
RBI ने आंकड़ों पर आधारित और सतर्क रुख अपनाया:
- महंगाई 4% के लक्ष्य से ऊपर जा चुकी है, पर अंतर्निहित (core) महंगाई काबू में
- मानसून और मौसमी असर से खाद्य कीमतें बढ़ने लगी हैं
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक/US-Iran तनाव भी जोखिम
- ग्रोथ को सहारा देने और महंगाई पर नजर — दोनों के बीच संतुलन साधने की कोशिश
बड़ी तस्वीर: मजबूत आधार पर सतर्क कदम
यह फैसला ऐसे समय आया है जब घरेलू अर्थव्यवस्था के संकेत मजबूत हैं — जुलाई में रिकॉर्ड GST कलेक्शन (₹2.11 लाख करोड़) और जोरदार ऑटो बिक्री इसकी मिसाल हैं। स्थिर ब्याज दर से कारोबार और आम लोगों को नीति में स्थिरता का भरोसा मिलता है।
जानकारों के मुताबिक RBI आने वाले महीनों में महंगाई और वैश्विक हालात पर नजर रखेगा, और जरूरत पड़ने पर ही अगला कदम उठाएगा। गवर्नर की टिप्पणी से यह भी संकेत मिलेगा कि आगे दरों की दिशा क्या रहेगी — फिलहाल के लिए स्थिरता और सतर्कता ही RBI का मंत्र है।
(यह जानकारी RBI की घोषणा और बाजार रिपोर्ट्स पर आधारित है, निवेश सलाह नहीं।)
Sources: Business Standard | Business Today

