नई दिल्ली. सावन के हर मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत आज, 4 अगस्त से शुरू हो रहा है — यह इस साल का पहला मंगला गौरी व्रत है। इस दिन सुहागिन महिलाएं मां गौरी (देवी पार्वती) की पूजा** कर अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं। सावन भगवान शिव का महीना है, ऐसे में शिव के साथ मां पार्वती की आराधना का इस महीने विशेष महत्व माना जाता है।
इस साल कब-कब है मंगला गौरी व्रत
उत्तर भारत में इस साल मंगला गौरी व्रत की तारीखें:
| व्रत | तारीख |
|——|——–|
| पहला (आज) | 4 अगस्त |
| दूसरा | 11 अगस्त |
| तीसरा | 18 अगस्त |
| चौथा | 25 अगस्त |
(दक्षिण भारत/महाराष्ट्र-गुजरात में तारीखें भिन्न हो सकती हैं, अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।)
व्रत का महत्व
- मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं
- कुछ क्षेत्रों में कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर की कामना से व्रत करती हैं
- मान्यता है कि मां गौरी की कृपा से दांपत्य सुख, संतान सुख और परिवार में समृद्धि आती है
- संख्या 16 को इस व्रत में शुभ माना जाता है (16 श्रृंगार, 16 दीपक, 16 प्रकार की सामग्री)
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ (लाल/हरे) वस्त्र धारण करें
- मां गौरी की मूर्ति/तस्वीर स्थापित कर 16 श्रृंगार अर्पित करें
- क्रम से मां मंगला गौरी का आवाहन, गणेश आवाहन, फिर सभी देवी-देवताओं का आवाहन करें
- मंगला गौरी व्रत कथा पढ़ें, आरती और पुष्पांजलि करें
- सूर्योदय से शाम की पूजा तक व्रत रखें, पूजा के बाद पारण करें
किन बातों का रखें ध्यान
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है — व्रत के दौरान वाणी और व्यवहार में संयम रखें, क्रोध से बचें, और श्रद्धा-भाव से पूजा करें। व्रत कथा जरूर सुनें/पढ़ें, क्योंकि इसे व्रत का अहम हिस्सा माना जाता है। सावन का यह मंगलवार भक्ति, त्याग और परिवार के कल्याण की भावना का प्रतीक है। मां गौरी और भोलेनाथ की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ आज घर-घर में मंगला गौरी की पूजा होगी।
(यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है; तारीखें और विधि क्षेत्रीय परंपरा अनुसार भिन्न हो सकती हैं।)

