नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट प्रशासन के लिए एक बड़ा दिन — सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और देश के सभी राज्य क्रिकेट संघों को नोटिस भेजकर पूछा है कि उन्हें ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025’ के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए।
क्या है नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025
यह कानून देश में खेल संस्थाओं के प्रशासन के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार करता है, जिसमें शामिल हैं:
- पदाधिकारियों के कार्यकाल की सीमा
- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता
- शासन व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े सख्त नियम
अगर सुप्रीम कोर्ट BCCI और राज्य क्रिकेट संघों को इस कानून के दायरे में लाने का रास्ता साफ करता है, तो क्रिकेट प्रशासन के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
चीफ जस्टिस की बेंच का रुख
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इस संबंध में BCCI के वकीलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस सवाल का जवाब दें। साथ ही रिपोर्ट्स के मुताबिक 2 राज्य क्रिकेट संघ पहले ही AGM (वार्षिक आम बैठक) से बाहर** हो चुके हैं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
क्यों अहम है यह मामला
BCCI लंबे समय से खुद को एक स्वायत्त निजी संस्था बताते हुए सरकारी नियमन से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, भले ही वह भारतीय टीम का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करता हो। अगर कोर्ट का रुख BCCI के खिलाफ जाता है, तो:
1. BCCI और राज्य संघों में चुनाव और कार्यकाल के नियम सरकारी कानून के दायरे में आ सकते हैं।
2. वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
3. भारतीय क्रिकेट प्रशासन के ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
आगे क्या
BCCI और राज्य संघों को अब कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा। क्रिकेट जगत में इस मामले पर गहरी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इसका असर देश के सबसे शक्तिशाली और अमीर खेल संगठन के भविष्य पर सीधा पड़ सकता है।
Sources: India TV | Prabhat Khabar

