मुंबई। भारतीय रुपये में आज ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे टूटकर 94.56 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट मुख्य रूप से IT सेक्टर के शेयरों में हुई भारी बिकवाली** के दबाव में आई।
गिरावट के पीछे मुख्य कारण
- IT सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का सीधा असर करेंसी बाजार पर पड़ा, क्योंकि IT कंपनियों की डॉलर आय पर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
- वैश्विक स्तर पर मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी रुपये पर दबाव बनाया।
- विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से निकासी (FII आउटफ्लो) भी गिरावट की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
आम आदमी पर क्या होगा असर
| असर | कारण |
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| पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है | कच्चे तेल का आयात डॉलर में होता है |
| विदेश यात्रा और पढ़ाई महंगी | डॉलर में भुगतान महंगा पड़ेगा |
| आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स/मशीनरी महंगी | डॉलर आधारित आयात लागत बढ़ेगी |
| IT/एक्सपोर्ट कंपनियों को फायदा | डॉलर में कमाई का रुपये में मूल्य बढ़ेगा |
रिजर्व बैंक की भूमिका
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये में बहुत तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचकर हस्तक्षेप कर सकता है, हालांकि दीर्घकालिक रुझान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
आगे क्या रुख रहेगा
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रहेगी और FII आउटफ्लो जारी रहेगा, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि त्योहारी सीजन में विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद से कुछ राहत मिल सकती है।
Sources: Asianet News Hindi | ETV Bharat

