नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के इतर शनिवार को एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच करीब 50 मिनट तक द्विपक्षीय बातचीत हुई। यह 2020 के गलवान टकराव के बाद भारतीय धरती पर दोनों नेताओं की पहली औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकात** थी।
क्यों है यह मुलाकात ऐतिहासिक
- यह गलवान झड़प के बाद करीब सात साल में पहली बार है जब दोनों नेता भारत की धरती पर आमने-सामने बैठे।
- मुलाकात भारत-चीन संबंधों में पिछले कुछ समय से दिख रहे सुधार के संकेतों के बीच हुई।
- वैश्विक स्तर पर इस मुलाकात पर कूटनीतिक हलकों की गहरी नजर रही।
PM मोदी का ‘तीन म्यूचुअल’ मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में तीन ‘म्यूचुअल’ (आपसी) सिद्धांतों पर जोर दिया:
1. **आपसी सम्मान (Mutual Respect)
2. **आपसी संवेदनशीलता (Mutual Sensitivity)
3. **आपसी हित (Mutual Interest)
मोदी ने साफ कहा कि मतभेदों को विवाद में न बदलने दिया जाए, और दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाया जाए।
शी जिनपिंग का बयान
मुलाकात के बाद शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे से सीखना चाहिए — यह बयान दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की मंशा का संकेत माना जा रहा है।
सीमा विवाद पर भी हुई बात
रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) से जुड़े सीमा मुद्दों पर भी चर्चा हुई, हालांकि दोनों पक्षों ने इस पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में सामान्यीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है, हालांकि सीमा पर वास्तविक स्थिति और आपसी विश्वास बहाली में अभी भी लंबा वक्त लग सकता है।
Sources: AajTak | Vistaar News

