नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के पहले दिन ही एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि हासिल हुई — सदस्य देशों ने ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। यह घोषणापत्र “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”** थीम के तहत भारत की अध्यक्षता में तैयार किया गया।
घोषणापत्र की मुख्य बातें
आतंकवाद पर सख्त रुख
- BRICS देशों ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई।
- 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोगों की जान गई थी) की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
- सीमा पार आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और सेफ हैवन के खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग की गई।
- संयुक्त राष्ट्र में Comprehensive Convention on International Terrorism को जल्द अंतिम रूप देने की अपील दोहराई गई।
वेस्ट एशिया संघर्ष पर चिंता
- बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए संयम, संवाद और कूटनीतिक समाधान की अपील की गई।
- गाजा में नागरिकों की सुरक्षा और निर्बाध मानवीय सहायता पहुंचाने पर जोर दिया गया।
- वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान से बचाव की जरूरत बताई गई।
वैश्विक शासन सुधार
- संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन किया गया।
- एकतरफा टैरिफ के खिलाफ रुख अपनाया गया।
- मुद्रा, व्यापार और AI से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति बनी।
मोदी की कूटनीतिक जीत
सदस्य देशों के बीच वेस्ट एशिया और अन्य संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों पर गहरे मतभेदों के बावजूद आम सहमति बनाना भारत की अध्यक्षता के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है। इससे BRICS को वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ के तौर पर मजबूत करने में मदद मिली है।
क्यों अहम है यह घोषणापत्र
दिनों की गहन बातचीत के बाद बनी यह सहमति दिखाती है कि भारत ने विरोधाभासी हितों वाले देशों को भी एक मंच पर लाकर एक साझा रुख तैयार करने में सफलता पाई। यह भारत की वैश्विक कूटनीतिक साख को और मजबूत करता है।

