नई दिल्ली.** मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का आंदोलन आज, मंगलवार को और व्यापक स्तर पर पहुंच गया है। INDIA गठबंधन के “Save Democracy” अभियान के तहत आज देशभर के राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप दोहराए जा रहे हैं।
अब तक का सफर
विपक्ष का यह अभियान पिछले कुछ हफ्तों से लगातार तेज होता गया है — 2 अक्टूबर से जिला स्तर पर मार्च शुरू हुए, 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च के दौरान राहुल और प्रियंका गांधी को घंटों हिरासत में रखा गया, 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चार सूत्री ज्ञापन सौंपा गया, और 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर ममता बैनर्जी समेत सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
आज राज्य मुख्यालयों पर प्रदर्शन क्यों
तमिलनाडु में हुई बैठक में लिए गए प्रस्ताव के मुताबिक, INDIA गठबंधन के दलों ने आज देश के सभी राज्य मुख्यालयों पर एक साथ “Save Democracy” प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इसका मकसद आंदोलन को सिर्फ दिल्ली तक सीमित न रखकर राष्ट्रव्यापी स्वरूप देना है, जिससे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव और बढ़े।
विपक्ष की मुख्य मांगें
- CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
- SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया पर रोक
- मतपत्र से मतदान की बहाली
- हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम वापस जोड़ना
- CEC और चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी इम्युनिटी वाले 2023 कानून को रद्द करना
आगे क्या
सरकार और भाजपा इस आंदोलन को “राजनीति से प्रेरित” बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। मामला अब सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन और अब राज्य स्तर तक फैल चुका है, जिससे आने वाले दिनों में और टकराव की आशंका है।
Sources: DT Next | Outlook India

