नई दिल्ली.** मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर चल रहा विपक्ष का आंदोलन अब देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था तक पहुंच गया है। शुक्रवार (9 अक्टूबर) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर चार सूत्री ज्ञापन सौंपने के बाद, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ऐलान किया था कि INDIA गठबंधन सोमवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को अलग से ज्ञापन सौंपेगा — यानी आज विपक्ष का यह अभियान कार्यपालिका से आगे बढ़कर न्यायपालिका तक फैल गया है।
राष्ट्रपति भवन में क्या हुआ
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बैनर्जी समेत 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया पर रोक, मतपत्र से मतदान की बहाली और 13.30 करोड़ “हटाए गए” मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने की मांग की थी। बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वे हैरान हैं कि राष्ट्रपति ने उनके किसी भी आरोप का खंडन नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला गरम
इससे पहले 5 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने CEC को तुरंत सस्पेंड करने से इनकार किया, लेकिन चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस जारी कर कहा — “हम सभी फैसलों की जांच करेंगे, अगर कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं है तो उसे रद्द कर देंगे।”
अब आगे क्या
राहुल गांधी के ऐलान के मुताबिक अब विपक्ष सीधे CJI से भी हस्तक्षेप की मांग करेगा, जिससे CEC विवाद एक साथ तीन मोर्चों — सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन, और अब CJI को अलग ज्ञापन — पर सक्रिय हो गया है। विपक्ष का कहना है कि जब तक CEC इस्तीफा नहीं देते या हटाए नहीं जाते, आंदोलन जारी रहेगा।
Sources: Outlook India | Deccan Chronicle

