धर्म डेस्क. भगवान शिव की भक्ति का पावन महीना सावन अपने चरम पर है। इस बार सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक (उत्तर भारत में) चलेगा। इसी क्रम में सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है, और ठीक अगले दिन 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि** का महापर्व है। शिव भक्तों के लिए ये दिन बेहद खास माने जाते हैं, जब मंदिरों में जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा की धूम रहती है।
सावन सोमवार की तारीखें (उत्तर भारत)
- पहला सोमवार: 3 अगस्त (बीत चुका)
- दूसरा सोमवार: 10 अगस्त
- तीसरा सोमवार: 17 अगस्त
- चौथा सोमवार: 24 अगस्त
- सावन शिवरात्रि: 11 अगस्त (मंगलवार)
(महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में श्रावण 13 अगस्त से 11 सितंबर तक रहेगा।)
शिव पूजा और जलाभिषेक की विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- शिवलिंग पर जल, गंगाजल और दूध से अभिषेक करें
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
- व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फलाहार करें और शाम को शिव पूजा के बाद व्रत खोलें
व्रत का महत्व
मान्यता है कि सावन के सोमवार को व्रत रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं। सावन शिवरात्रि पर रातभर जागरण और शिव आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान भक्तों से अपील है कि मंदिरों में भीड़ के दौरान अनुशासन बनाए रखें और साफ-सफाई का ध्यान रखें।
(यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है।)
Sources: AajTak | Sanatana Journey

