धर्म डेस्क. सावन मास की पुत्रदा एकादशी (पवित्रा एकादशी) आज, 23 अगस्त 2026 (रविवार) को मनाई जा रही है। भगवान विष्णु को समर्पित यह एकादशी साल की 24 एकादशियों में से एक है और इसका विशेष महत्व है। ‘पुत्रदा’ का अर्थ है ‘पुत्र (संतान) देने वाली’ — मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से यह व्रत रखने पर निःसंतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में खुशहाली आती है। इसे पवित्रोपना एकादशी** भी कहा जाता है।
तिथि और पारण का समय
- एकादशी तिथि आरंभ: 23 अगस्त सुबह 2:00 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 24 अगस्त सुबह 4:19 बजे
- व्रत पारण (व्रत खोलना): 24 अगस्त को दोपहर 1:58 से शाम 4:29 बजे के बीच
(स्मार्त परंपरा के भक्त आज 23 अगस्त को, जबकि वैष्णव परंपरा के भक्त 24 अगस्त को व्रत रखते हैं।)
पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें
- भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाएं, तुलसी दल, फूल और फल अर्पित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
- दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखें
- रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन शुभ माने जाते हैं
- अगले दिन पारण के समय व्रत खोलें और जरूरतमंदों को दान दें
व्रत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान की प्राप्ति, उनकी लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए रखा जाता है। यह व्रत सिर्फ संतान सुख ही नहीं, बल्कि पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी माना जाता है। सावन का पवित्र महीना होने से इस एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है। भक्तों से अपील है कि श्रद्धा और स्वच्छता के साथ व्रत और पूजा करें।
(यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। मुहूर्त स्थान अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।)
Sources: NewsX | Rudraksha Ratna

