नई दिल्ली.** मंगलवार 6 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग (EC) के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च पर निकले, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को रोका और करीब 260 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर चल रहे इस अभियान का यह अब तक का सबसे बड़ा टकराव माना जा रहा है।
मार्च और हिरासत
सांसदों को मकर द्वार पर सुबह 10:30 बजे इकट्ठा होना था, जिसके बाद वे संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर पैदल बढ़े। ज्यादातर विपक्षी सांसदों को निर्वाचन सदन के रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए, जो EC दफ्तर से करीब 200 मीटर की दूरी पर है। लगभग दो घंटे की हिरासत के बाद राहुल, प्रियंका और अन्य नेता रिहा कर दिए गए।
EC का जवाब
चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने उससे मुलाकात का समय नहीं मांगा था। आयोग के मुताबिक उसे बाद में पुलिस के जरिए जानकारी मिली कि प्रस्तावित मुलाकात “पार्लियामेंट हाउस परिसर में 240 सांसदों के समूह” की है, जिसे आयोग ने अपने स्थापित प्रोटोकॉल के लिहाज से “असामान्य” बताया।
राहुल गांधी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने कहा, “मैं सिर्फ मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलना चाहता हूं और उन्हें बताना चाहता हूं कि उन्होंने ‘वोट चोरी’ की है।” कांग्रेस ने दावा किया कि उसने EC से मुलाकात का अनुरोध किया था और इस हिरासत को “उस सरकार का संकेत” बताया जिसका “निकास निकट है।”
अभियान का अगला चरण
यह मार्च विपक्ष के “लोकतंत्र बचाओ” अभियान का हिस्सा है, जिसमें 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर प्रदर्शन, राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग और 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली शामिल है। SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव अभी जारी है।
Sources: Daily Jagran | ANI

