लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की मौत के बाद अब कार्रवाई तेज हो गई है। लखनऊ पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों — रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र शुक्ला और तुषांक कृष्णा जायसवाल — को गिरफ्तार किया है। हादसे की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT)** का गठन किया गया है।
CM योगी के आदेश पर SIT और सख्ती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बनी SIT आग लगने के कारणों और नियमों के उल्लंघन की जांच करेगी। इसके साथ ही प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित (suspend) कर दिया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
अवैध निर्माण और नियमों की धज्जियां
शुरुआती जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पता चला है कि इमारत मूल रूप से आवासीय (residential) इस्तेमाल के लिए मंजूर थी, लेकिन 2014 से इसे कमर्शियल (व्यावसायिक) तौर पर चलाया जा रहा था। जांच में सामने आया कि इमारत में:
- अवैध रूप से बनाई गई मंजिलें (illegal floors)
- नियम विरुद्ध बेसमेंट निर्माण
- फायर NOC (No Objection Certificate) का अभाव
- फायर सेफ्टी के इंतजामों में बड़ी चूक
जैसी गंभीर खामियां थीं, जो इस हादसे को और भयावह बनाने की बड़ी वजह बनीं।
कोचिंग संस्थानों पर उठे सवाल
इस अग्निकांड ने एक बार फिर देशभर के कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आवासीय इमारतों में चल रहे कोचिंग सेंटर, संकरी सीढ़ियां और आपातकालीन निकास (emergency exit) का अभाव छात्रों की जान के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।
आगे क्या?
प्रशासन ने शहर के अन्य कोचिंग सेंटरों और कमर्शियल इमारतों की फायर सेफ्टी जांच का अभियान शुरू करने के संकेत दिए हैं। SIT की रिपोर्ट के बाद और गिरफ्तारियां तथा सख्त कार्रवाई संभव है। फिलहाल पूरे प्रदेश में इस हादसे को लेकर गुस्सा और शोक का माहौल है।

