नई दिल्ली. भगवान शिव की भक्ति का सबसे पावन महीना सावन (श्रावण) मास आज 30 जुलाई से शुरू हो गया है। उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) के अनुसार यह पवित्र महीना आज से 28 अगस्त (श्रावण पूर्णिमा/रक्षाबंधन)** तक चलेगा। सावन को शिव आराधना, सोमवार व्रत, जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा का महीना माना जाता है — पूरे महीने शिवालयों में ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे गूंजते हैं।
इस बार 4 सावन सोमवार, पहला 3 अगस्त को
सावन में सोमवार का व्रत सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं:
| सावन सोमवार | तारीख |
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| पहला | 3 अगस्त |
| दूसरा | 10 अगस्त |
| तीसरा | 17 अगस्त |
| चौथा | 24 अगस्त |
मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वर देते हैं — कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।
शिव पूजा और जलाभिषेक का महत्व
सावन में शिव आराधना का विशेष फल माना जाता है:
- शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और शहद अर्पित करें
- रुद्राभिषेक और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप शुभ फलदायी
- सोमवार व्रत में दिनभर उपवास, शाम को शिव पूजा के बाद पारण
- मंदिरों में सुबह से भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं
कांवड़ यात्रा: आस्था का सैलाब
सावन में कांवड़ यात्रा आस्था का सबसे बड़ा सैलाब लेकर आती है:
- लाखों कांवड़िए गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं
- हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री से जल लेकर भक्त अपने-अपने शिव मंदिरों तक जाते हैं
- सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन विशेष इंतजाम करता है
सावन का यह महीना सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सात्विक जीवनशैली, संयम और आत्मशुद्धि का भी संदेश देता है। मानसून के इस मौसम में हरियाली, तीज-त्योहार और भक्ति का संगम सावन को खास बनाता है। हरियाली तीज से लेकर रक्षाबंधन तक — पूरा महीना उत्सव और आस्था से भरा रहेगा।
(यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। सावन सोमवार की तारीखें क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।)
Sources: Daanyam | Amar Ujala

