दोहा. US और Iran के बीच कतर की राजधानी दोहा में 2 दिन तक चली अप्रत्यक्ष (indirect) वार्ता किसी बड़ी सफलता (breakthrough) के बिना खत्म हो गई — लेकिन दोनों पक्षों ने सीजफायर को आगे बढ़ाने के लिए कुछ ठोस कदमों पर सहमति जताई। यह बातचीत कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई, जिसमें अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग कमरों में बैठे और मध्यस्थ संदेश पहुंचाते रहे। यह जून 2026 में हुए 60-दिन के सीजफायर समझौते (MoU)** को लागू करने की कोशिश का हिस्सा है।
वार्ता में क्या तय हुआ
- फ्रोजन एसेट्स: Iran की जब्त की गई संपत्ति की पहली किस्त के लिए एक ‘गुड्स-परचेज मैकेनिज्म’ (सामान खरीद व्यवस्था) पर सहमति।
- कम्युनिकेशन चैनल: सीजफायर उल्लंघन की शिकायत और समाधान के लिए सीधा संवाद चैनल बनाने पर सहमति।
- Strait of Hormuz: इस अहम समुद्री रास्ते से सुरक्षित और भरोसेमंद आवाजाही बहाल करने पर फोकस।
हालांकि कई बड़े मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं और अगले दौर की बातचीत जल्द तय की जाएगी।
भारत के लिए क्यों अहम
Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता है — भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी से इसी रास्ते आयात करता है। इस रास्ते से सुरक्षित आवाजाही बहाल होना भारत के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता** आ सकती है और महंगाई पर दबाव घटेगा। भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिहाज से भी यह अहम है।
आगे की राह
दोहा वार्ता का बिना टूटे जारी रहना और ठोस कदमों पर सहमति बनना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। दोनों पक्षों ने आने वाले दिनों में बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। भारत समेत तमाम तेल-आयातक देश इस कूटनीतिक प्रक्रिया के नतीजे पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
Sources: Business Today | Al Jazeera

