बेंगलुरु। भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाने वाला PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) इन दिनों कड़ी जांच के दौर से गुजर रहा है। दो लगातार मिशन नाकाम होने के बाद ISRO अब इसकी थर्ड-पार्टी (बाहरी) समीक्षा** करा रहा है, ताकि गड़बड़ी की असली वजह का पता लगाया जा सके और भरोसा दोबारा कायम हो।
दो बार कहां फंसा PSLV?
ISRO को PSLV के दो लगातार मिशनों में झटका लगा, और दोनों बार दिक्कत तीसरे स्टेज (PS3) में आई:
- PSLV-C61 (मई 2025) — chamber pressure में गिरावट
- PSLV-C62 (जनवरी 2026) — roll-rate disturbance
जनवरी 2026 का लॉन्च भारत के साल के पहले मिशन के तौर पर था, लेकिन liftoff के करीब 8 मिनट बाद flight computers ने PS3 हिस्से में ‘performance disturbance’ पकड़ी। तीसरे स्टेज में जरूरी thrust नहीं बन पाया और रॉकेट अपने रास्ते से भटक गया।
अब थर्ड-पार्टी समीक्षा क्यों?
PS3 दरअसल एक solid rocket motor है, और दोनों बार इसी में दिक्कत आने से सवाल खड़े हुए हैं। ISRO ने अंदरूनी failure analysis committees तो बनाई ही हैं, साथ ही नतीजों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए बाहरी विशेषज्ञों से appraisal भी कराया जा रहा है। इसका मकसद है — खामी को पूरी तरह समझना और भविष्य के मिशनों को सुरक्षित बनाना।
कब होगी अगली उड़ान?
ISRO ने अगले PSLV मिशन के लिए जून 2026 का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह जांच पूरी होने और जरूरी सुधार लागू होने पर निर्भर करेगा। PSLV भारत के कई अहम सैटेलाइट और विदेशी पेलोड लॉन्च कर चुका है, इसलिए इसकी सफल वापसी देश के space program के लिए बेहद अहम है।
Sources: Business Standard | VARIndia

