नई दिल्ली. परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार ने ठोस और तेज कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया है। एक तरफ NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने 47 अधिकारियों को हटा दिया और कुछ के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की है, तो दूसरी तरफ सरकार ने CJP (Cockroach Janta Party) प्रतिनिधियों से बातचीत में उनकी तीन में से दो मांगें सैद्धांतिक रूप से मान लीं**। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर धरना सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की जिद पर अटका हुआ है।
सरकार के ठोस कदम
बीते दो दिनों में सरकार की ओर से एक के बाद एक ठोस कदम सामने आए:
- NTA ने 47 अधिकारी हटाए, कुछ के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई — यानी व्यवस्था के भीतर सफाई शुरू
- PM मोदी का ऐलान — कैबिनेट पेपर लीक पर सख्त कदमों पर विचार कर रही, अगले हफ्ते संसद में विधेयक (फास्ट-ट्रैक कोर्ट + कड़ी सजा)
- केंद्रीय मंत्री नड्डा और जितेंद्र सिंह ने खुद CJP प्रतिनिधियों से Constitution Club में मुलाकात की
- इसी संवाद के बाद सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन समाप्त किया
यह जवाबदेही और संवाद, दोनों का संकेत है — सरकार समस्या के समाधान की दिशा में सक्रिय दिख रही है।
दो मांगें मंजूर, एक पर सिर्फ ‘इस्तीफा’ की जिद
CJP प्रतिनिधियों (सौरव दास, आशुतोष रांका) के मुताबिक सरकार ने बातचीत में:
- मृत परीक्षार्थियों के परिवारों को मुआवजा — सैद्धांतिक रूप से मंजूर
- प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेना — सैद्धांतिक रूप से मंजूर
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा — इस पर सरकार ने कल दोपहर तक का समय मांगा; बातचीत अनिर्णीत रही
यानी छात्रों से जुड़ी दो ठोस मांगों पर सहमति बन गई है, और अटकाव सिर्फ राजनीतिक रूप से संवेदनशील ‘इस्तीफे’ की मांग पर है — जिसे CJP ने अंतिम शर्त बना रखा है।
सवाल: समाधान या टकराव?
जब सरकार ने परीक्षा सुधार (कानून), जवाबदेही (47 अधिकारी हटाए) और राहत (मुआवजा, FIR वापसी) — तीनों पर कदम बढ़ा दिए हैं, तो यह सवाल लाजिमी है कि धरने को सिर्फ एक इस्तीफे की मांग पर टिकाए रखना कितना जायज है। छात्रों की असली जीत व्यवस्था के सुधरने में है या किसी एक मंत्री के इस्तीफे में — यह बहस अब तेज हो गई है।
फिलहाल दिल्ली में सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त CRPF तैनात है और 17 मेट्रो स्टेशन एहतियातन बंद रहे। सबकी नजर अब इस पर है कि आने वाले पेपर-लीक विधेयक का स्वरूप क्या होता है और CJP आगे क्या रुख अपनाती है।
(समाचार तथ्य ऊपर दिए स्रोतों पर आधारित हैं; मांगें और उनसे जुड़े बयान CJP प्रतिनिधियों के हैं, सरकारी कदम आधिकारिक घोषणाओं/रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।)
Sources: ThePrint | Business Today

