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पेपर लीक पर सबसे सख्त कानून: लोकसभा में पेश विधेयक में 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माना — 60 दिन में जांच, स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई

पेपर लीक पर सबसे सख्त कानून: लोकसभा में पेश विधेयक में 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माना — 60 दिन में जांच, स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई
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नई दिल्ली. NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार ने परीक्षा गड़बड़ियों पर अब तक का सबसे सख्त कानूनी वार किया है। ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ सोमवार को लोकसभा में पेश हो गया — इसे केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह** ने पेश किया। 24 जुलाई को कैबिनेट की मंजूरी के बाद पेश इस विधेयक में पेपर लीक के दोषियों के लिए बेहद कड़े प्रावधान रखे गए हैं।

विधेयक के सबसे सख्त प्रावधान

नए कानून में दोषियों पर शिकंजा कसने के लिए कड़े कदम प्रस्तावित हैं:

  • 10 साल तक की जेल की सजा
  • ₹10 करोड़ तक का जुर्माना
  • जांच प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी करने की समयसीमा
  • स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए मामलों की तेज सुनवाई और निपटारा
  • दोषी व्यक्तियों के साथ-साथ कोचिंग सेंटरों और सर्विस प्रोवाइडरों पर भी कार्रवाई

यह विधेयक 2024 के मौजूदा कानून को और मजबूत बनाता है, ताकि संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कड़ाई से लगाम लगाई जा सके।

आंदोलन के बाद सरकार का ठोस समाधान

यह कानून उन ठोस कदमों की कड़ी है, जो सरकार ने परीक्षा गड़बड़ी के मुद्दे पर लगातार उठाए:

  • गड़बड़ी सामने आते ही CBI जांच, परीक्षा रद्द और री-एग्जाम (21 जून)
  • NTA ने 47 अधिकारी हटाए, कुछ पर आपराधिक कार्रवाई
  • मृत परीक्षार्थियों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर FIR वापसी पर सहमति
  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा (प्रह्लाद जोशी को अंतरिम प्रभार)

इन कदमों के बाद ही महीनेभर से चला CJP आंदोलन खत्म हुआ था। अब यह सख्त कानून छात्रों की मांग — ‘पेपर लीक रुके, दोषियों को सजा मिले’ — का सबसे स्थायी जवाब है।

संसद में विपक्ष का हंगामा जारी

हालांकि विधेयक पेश होने के दौरान भी विपक्षी सांसदों का हंगामा जारी रहा — वे 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते रहे। विधेयक फिलहाल पेश (introduce) हुआ है, पास होना बाकी है। सरकार इसे इसी मानसून सत्र में पारित कराना चाहती है।

बड़ी बात यह है कि छात्रों की असली जीत किसी टकराव में नहीं, बल्कि ऐसे सख्त और स्थायी कानून में है जो हर साल लाखों मेहनती परीक्षार्थियों के भविष्य की रक्षा करे। सरकार ने संवाद और कार्रवाई के जरिए मामले को समाधान तक पहुंचाया है, और यह विधेयक उसी दिशा में निर्णायक कदम है। अब नजर इस पर रहेगी कि कानून कितनी जल्दी पास होता है और जमीन पर इसका अमल कितना प्रभावी रहता है।

(समाचार तथ्य ऊपर दिए स्रोतों पर आधारित हैं; विधेयक के प्रावधान प्रस्तावित हैं और संसद की मंजूरी पर निर्भर करेंगे।)

Sources: ANI | Testbook | The Federal

By Nilesh

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