नई दिल्ली. NEET पेपर लीक विवाद के बाद उठे तूफान का सबसे ठोस और स्थायी जवाब अब कानून की शक्ल ले चुका है। लोकसभा ने बुधवार (29 जुलाई) को ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित** कर दिया। दो दिनों तक चली तीखी बहस के बाद इस सख्त कानून को मंजूरी मिली, जो पेपर लीक के दोषियों पर कड़ा शिकंजा कसेगा।
कानून के सबसे सख्त प्रावधान
नए कानून में परीक्षा गड़बड़ी के दोषियों के लिए बेहद कड़े प्रावधान हैं:
- 10 साल तक की जेल की सजा
- ₹10 करोड़ तक का जुर्माना
- दोषियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान
- स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए तेज सुनवाई
- 3 महीने के भीतर फैसला सुनिश्चित करने की व्यवस्था
- समयबद्ध जांच — तय समयसीमा में जांच पूरी करने का नियम
यह कानून 2024 के मौजूदा ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) अधिनियम’ को और मजबूत बनाता है, ताकि संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कड़ाई से लगाम लगे।
सरकार ने पूरा किया छात्रों से वादा
यह कानून उन ठोस कदमों की आखिरी और सबसे बड़ी कड़ी है, जो सरकार ने परीक्षा गड़बड़ी के मुद्दे पर उठाए:
- गड़बड़ी सामने आते ही CBI जांच, परीक्षा रद्द और री-एग्जाम (21 जून)
- NTA ने 47 अधिकारी हटाए, कुछ पर आपराधिक कार्रवाई
- मृत परीक्षार्थियों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर FIR वापसी पर सहमति
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा (प्रह्लाद जोशी को अंतरिम प्रभार)
- और अब यह सख्त कानून — छात्रों की मूल मांग का सबसे स्थायी समाधान
गौरतलब है कि 20 जुलाई के CJP के ‘चलो संसद’ आंदोलन और वांगचुक की भूख हड़ताल के बाद सरकार ने संवाद और कार्रवाई, दोनों के जरिए मामले को समाधान तक पहुंचाया।
अब राज्यसभा में, फिर बनेगा कानून
लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में जाएगा, और वहां से मंजूरी व राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बन जाएगा। गुजरात के CM और डिप्टी CM समेत कई नेताओं ने इस सख्त कानून का स्वागत किया है।
बड़ी बात यह है कि यह कानून हर साल परीक्षा में बैठने वाले लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा। पेपर लीक जैसे संगठित अपराध पर 10 साल की जेल, करोड़ों का जुर्माना और संपत्ति जब्ती जैसे प्रावधान माफियाओं में डर पैदा करेंगे। सरकार ने साबित किया कि छात्रों की असली जीत टकराव में नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी व्यवस्था-सुधार में है। अब असली परख कानून के जमीनी अमल की होगी।
(समाचार तथ्य ऊपर दिए स्रोतों पर आधारित हैं; कानून राज्यसभा और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रभावी होगा।)
Sources: SCC Online | New Kerala | Prokerala

