नई दिल्ली. NEET पेपर लीक विवाद के बाद आए सख्त कानून को अब संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई है। लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी गुरुवार (30 जुलाई) को ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया। हालांकि उच्च सदन में विधेयक पारित होने से पहले विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी** के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा।
कानून के सख्त प्रावधान — और कड़े हुए
राज्यसभा में पेश करते हुए मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे ‘छात्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता’ बताया। नए प्रावधान और सख्त हैं:
- संगठित पेपर लीक अपराध में न्यूनतम सजा 5 से बढ़ाकर 7 साल (अधिकतम 10 साल तक)
- अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़
- सर्विस प्रोवाइडर के लिए जुर्माना ₹5 करोड़ तक, और परीक्षा कराने से प्रतिबंध 4 से बढ़ाकर 8 साल
- केंद्र को पेपर लीक की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार
- नई धारा 12A — 2 महीने के भीतर जांच पूरी
- सत्र न्यायालयों को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट का दर्जा, रोजाना सुनवाई
- चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा
सरकार ने पूरा किया छात्रों से वादा
यह कानून उन ठोस कदमों की सबसे बड़ी और आखिरी कड़ी है, जो सरकार ने परीक्षा गड़बड़ी पर उठाए:
- गड़बड़ी सामने आते ही CBI जांच, परीक्षा रद्द और री-एग्जाम (21 जून)
- NTA ने 47 अधिकारी हटाए, कुछ पर आपराधिक कार्रवाई
- मृत परीक्षार्थियों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर FIR वापसी पर सहमति
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा (प्रह्लाद जोशी को अंतरिम प्रभार)
- और अब दोनों सदनों से पारित सख्त कानून
CJP आंदोलन के प्रदर्शनकारी पहले ही कह चुके थे कि उनकी मांगें मान ली गईं, और इसके बाद उन्होंने जंतर-मंतर का धरना खत्म कर दिया था।
अब असली परख: जमीनी अमल
2024 के मौजूदा कानून को और मजबूत बनाने वाला यह विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा। पेपर लीक जैसे संगठित अपराध पर 10 साल की जेल, करोड़ों का जुर्माना, संपत्ति जब्ती और स्पेशल टास्क फोर्स जैसे प्रावधान माफियाओं में डर पैदा करेंगे और लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य की रक्षा करेंगे।
बड़ी तस्वीर यह है कि सरकार ने संवाद, कार्रवाई और अब कानून — तीनों के जरिए एक बड़े छात्र-आंदोलन को समाधान तक पहुंचाया। अब सबसे अहम होगा कानून का सख्त और ईमानदार जमीनी अमल, ताकि परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल हो।
(समाचार तथ्य ऊपर दिए स्रोतों पर आधारित हैं; कानून राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रभावी होगा।)
Sources: ANI | India TV | Testbook

