नई दिल्ली. Cockroach Janta Party (CJP) के आंदोलन की कामयाबी के बाद सोशल मीडिया पर एक और मुहिम तेजी से वायरल हो रही है — ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (RHA)। इंस्टाग्राम पर यह पेज महज कुछ दिनों में करीब 56-60 लाख (5.6-5.9 मिलियन) फॉलोअर्स तक पहुंच गया है — रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले 24 घंटे में ही 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़े। यह मुहिम जाति आधारित आरक्षण* को शिक्षा और सरकारी नौकरियों से हटाने की मांग कर रही है। पर जितनी तेजी से इसे फॉलोअर्स मिल रहे हैं, उतना ही तीखा विरोध भी हो रहा है। (यह एक संवेदनशील और बहस वाला विषय है; यह रिपोर्ट दोनों पक्षों को तथ्यात्मक रूप से पेश करती है।)
आंदोलन की 5 प्रमुख मांगें
RHA ने खुद को ‘नागरिकों द्वारा संचालित’ और ‘गैर-राजनीतिक’ बताते हुए ये मांगें रखी हैं:
- मेरिट को जाति से ऊपर रखा जाए (admissions में)
- सभी छात्रों के लिए समान फीस
- समान आयु सीमा
- समान कट-ऑफ
- सरकारी फॉर्म और सार्वजनिक जीवन में जाति दर्ज करना बंद हो — नारा ‘One Nation, One Identity — Indian’
आंदोलन का दावा है कि जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए पहले सरकारी व्यवस्था से जाति की पहचान हटानी होगी।
तरीका: सड़क नहीं, कमेंट सेक्शन
CJP की तरह यह आंदोलन भी पारंपरिक धरना-प्रदर्शन के बजाय डिजिटल रणनीति पर टिका है:
- समर्थकों से PM और मंत्रियों की सोशल मीडिया पोस्ट के कमेंट सेक्शन में आरक्षण-विरोधी संदेश भरने की अपील
- इंस्टाग्राम और X पर सक्रिय; ‘Educate-Agitate-Organize’ जैसे नारे
- नेतृत्व गुमनाम (anonymous) बताया जा रहा है; पेज खुद को किसी राजनीतिक दल से असंबद्ध बताता है
- मुख्य रूप से जनरल कैटेगरी के Gen-Z छात्र इससे जुड़ रहे हैं
विरोध: ‘भेदभाव की हकीकत को नजरअंदाज करता है’
इस आंदोलन को सोशल मीडिया पर भारी विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। आलोचकों के तर्क:
- आरक्षण एक संवैधानिक व्यवस्था है, जो सदियों से SC, ST और OBC समुदायों के साथ हुए भेदभाव और शिक्षा, संसाधन व सम्मान से वंचना को दूर करने के लिए बनाई गई
- कई यूजर्स और क्रिएटर्स का कहना है कि आंदोलन आज भी मौजूद जातिगत भेदभाव की गहरी हकीकत को नजरअंदाज करता है
- आरक्षण सिर्फ ‘गरीबी हटाने’ का उपाय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का सवाल है
- कई लोग मानते हैं कि ‘मेरिट बनाम आरक्षण’ की बहस मुद्दे को बहुत सरल बना देती है
बड़ी तस्वीर: सोशल मीडिया आंदोलनों की नई लहर
RHA, CJP और E20 Janta Party जैसे आंदोलन दिखाते हैं कि सोशल मीडिया पर संगठित होने वाली एक नई Gen-Z सक्रियता उभर रही है, जो अलग-अलग मुद्दों पर सरकार और व्यवस्था से सवाल कर रही है। आरक्षण भारत की सबसे पुरानी और संवेदनशील नीतिगत बहसों में से एक है — इसके पक्ष और विपक्ष दोनों में गहरे तर्क और भावनाएं जुड़ी हैं।
फिलहाल सरकार या किसी बड़े राजनीतिक दल की ओर से इस आंदोलन पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकारों के मुताबिक इतने संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी पक्ष को जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय संविधान, सामाजिक न्याय और समानता — तीनों पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। यह देखना अहम होगा कि यह ऑनलाइन मुहिम आगे किस दिशा में जाती है।
(यह रिपोर्ट एक वायरल सोशल मीडिया आंदोलन और उस पर हो रही बहस को तथ्यात्मक व निष्पक्ष रूप से पेश करती है। इसमें व्यक्त मांगें आंदोलन की और आपत्तियां आलोचकों की हैं; यह किसी पक्ष का समर्थन नहीं है। आंकड़े रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और तेजी से बदल रहे हैं।)
Sources: Outlook India | AajTak | Indiablooms

