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पेपर लीक पर सख्त कानून लागू: राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी के बाद अब बना कानून — 10 साल तक जेल, संपत्ति जब्ती और हर राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट

पेपर लीक पर सख्त कानून लागू: राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी के बाद अब बना कानून — 10 साल तक जेल, संपत्ति जब्ती और हर राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट
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नई दिल्ली. NEET पेपर लीक विवाद के बाद उठे तूफान का सबसे ठोस और स्थायी जवाब अब पूरी तरह कानून बन गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी** दे दी है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधि मंत्रालय की गजट अधिसूचना के साथ यह अब लागू हो गया है — यानी परीक्षा गड़बड़ी करने वालों पर अब सबसे कड़ा शिकंजा।

कानून बनने तक का सफर

  • 27 जुलाई: लोकसभा में पेश और पारित
  • 30 जुलाई: राज्यसभा से पारित (विपक्ष के वॉकआउट के बीच)
  • 1 अगस्त: राष्ट्रपति की मंजूरी → कानून लागू

कानून के सख्त प्रावधान

नए कानून में परीक्षा गड़बड़ी के दोषियों के लिए बेहद कड़े प्रावधान हैं:

  • दोषियों को न्यूनतम 5 से अधिकतम 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना
  • संगठित पेपर लीक और सर्विस प्रोवाइडरों पर और कड़ा जुर्माना (करोड़ों तक)
  • परीक्षा-अपराध से अर्जित संपत्ति की जब्ती
  • हर राज्य में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट — तेज सुनवाई
  • समयबद्ध जांच और तय समय में ट्रायल पूरा करने का प्रावधान
  • स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति
  • गड़बड़ी में शामिल संस्थानों और सर्विस प्रोवाइडरों पर सख्त कार्रवाई

यह कानून 2024 के मौजूदा ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) अधिनियम’ को और मजबूत बनाता है।

सरकार ने पूरा किया छात्रों से वादा

यह कानून उन ठोस कदमों की सबसे बड़ी और आखिरी कड़ी है, जो सरकार ने परीक्षा गड़बड़ी पर उठाए — CBI जांच, री-एग्जाम, NTA में 47 अधिकारियों पर कार्रवाई, मृत परीक्षार्थियों के परिवारों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों पर FIR वापसी, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और अब यह सख्त कानून। CJP आंदोलन के प्रदर्शनकारी पहले ही कह चुके थे कि उनकी मांगें मान ली गईं और उन्होंने धरना खत्म कर दिया था।

बड़ी बात यह है कि सरकार ने संवाद, कार्रवाई और कानून — तीनों के जरिए एक बड़े छात्र-आंदोलन को समाधान तक पहुंचाया। पेपर लीक जैसे संगठित अपराध पर 10 साल की जेल, संपत्ति जब्ती और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान माफियाओं में डर पैदा करेंगे। अब असली परख कानून के सख्त और ईमानदार जमीनी अमल की होगी — ताकि हर साल परीक्षा में बैठने वाले लाखों मेहनती छात्रों का व्यवस्था पर भरोसा पूरी तरह बहाल हो।

(समाचार तथ्य ऊपर दिए स्रोतों पर आधारित हैं। सजा/जुर्माने के प्रावधानों का ब्योरा गजट अधिसूचना/कानून के अनुसार है।)

Sources: Republic World | The Tribune | The Hans India

By Nilesh

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