नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इमारत हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने आज इस मामले पर सुनवाई की, जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर देखने की जरूरत है।
हादसे की पृष्ठभूमि
- रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत गिर गई थी।
- इस हादसे में 7 छात्रों की मौत हो गई और 5 अन्य घायल हुए।
- इमारत मालिक हरिराम, उसकी पत्नी और बेटे को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, साथ ही कई MCD अफसर भी सस्पेंड हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि जरूरत पड़ने पर वह दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मामले को अपने पास ट्रांसफर भी कर सकता है। कोर्ट के निर्देश निम्न मुद्दों से जुड़े हैं:
1. रिहायशी इलाकों में बिना मंजूरी के निर्माण पर सख्ती।
2. आग और संरचनात्मक सुरक्षा के मानकों का पालन।
3. नियम तोड़कर रिहायशी इमारतों को वाणिज्यिक इस्तेमाल में बदलने पर रोक।
पैन-इंडिया सेफ्टी ऑडिट के संकेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक कोर्ट के रुख से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में देशभर में असुरक्षित इमारतों की व्यापक सेफ्टी ऑडिट की मांग तेज हो सकती है, खासकर PG हॉस्टल और किराए की इमारतों को लेकर, जहां सुरक्षा मानकों की अक्सर अनदेखी होती है।
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद उम्मीद है कि सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अन्य बड़े शहरों में भी असुरक्षित इमारतों को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। अगली सुनवाई की तारीख जल्द तय होने की उम्मीद है।
Sources: Amrit Vichar | Times Now Hindi

