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लोहागढ़ केस अपडेट: जुलाई के अंत तक कहां पहुंची जांच — सिया-चेतन यरवडा जेल में, पुलिस डिजिटल सबूतों पर बना रही ‘फुलप्रूफ’ चार्जशीट; अब सितंबर तक की डेडलाइन अहम

लोहागढ़ केस अपडेट: जुलाई के अंत तक कहां पहुंची जांच — सिया-चेतन यरवडा जेल में, पुलिस डिजिटल सबूतों पर बना रही ‘फुलप्रूफ’ चार्जशीट; अब सितंबर तक की डेडलाइन अहम
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पुणे. लोहागढ़ किले पर कारोबारी केतन अग्रवाल (25) की मौत का मामला जुलाई खत्म होते-होते एक अहम मोड़ पर है। मुख्य आरोपी सिया गोयल (20) और चेतन चौधरी (22) फिलहाल यरवडा सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं, और पुणे ग्रामीण पुलिस अब सबसे अहम काम — मजबूत चार्जशीट** — तैयार करने में जुटी है। आइए एक नजर डालते हैं कि जुलाई के अंत तक यह हाई-प्रोफाइल केस कहां पहुंचा है।

जांच की पूरी टाइमलाइन

  • 18 जून: लोहागढ़ किले से गिरकर केतन की मौत — शुरू में ‘हादसा’, बाद में पुलिस के मुताबिक कथित सुनियोजित हत्या
  • जून अंत: सिया गोयल और चेतन चौधरी गिरफ्तार, पहले पुलिस फिर न्यायिक हिरासत
  • जुलाई: लगातार हिरासत बढ़ती रही; पॉलीग्राफ की पुलिस मांग खारिज; चेतन के साथ क्राइम सीन रीक्रिएशन
  • दोनों आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में

पुलिस की चुनौती और तैयारी

चूंकि केस में कोई चश्मदीद गवाह या वारदात का सीधा वीडियो फुटेज नहीं है, पुलिस का पूरा दारोमदार डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों पर है:

  • कॉल रिकॉर्ड, WhatsApp/Snapchat चैट और कथित कोड वर्ड
  • मोबाइल लोकेशन डेटा, CCTV फुटेज और पैसों के लेनदेन (मनी-ट्रेल)
  • ‘लापता पासपोर्ट’ और अपराध स्थल के सटीक स्थान जैसे एंगल

पुलिस चार्जशीट में कोई कानूनी चूक नहीं चाहती, ताकि सीधे सबूतों की कमी में भी केस अदालत में टिक सके — क्योंकि कमजोर सबूतों की स्थिति में बचाव पक्ष जमानत की कोशिश कर सकता है।

जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया

  • पुलिस के मुताबिक साजिश के कई कथित चरण — पहले घायल/अपाहिज बनाने, फिर सुपारी (जो किलर के इनकार से फेल हुई), और आखिर में वारदात
  • जांच में सामने आया कि वारदात में सिया-चेतन के अलावा कोई तीसरा सीधे तौर पर शामिल नहीं था
  • कथित ‘गुपचुप शादी’ का दावा खाटू श्याम मंदिर के CCTV में सत्यापित नहीं हुआ
  • बचाव पक्ष केस को ‘हादसा’ बताकर और सीधे सबूतों की कमी का हवाला देकर चुनौती दे रहा है
  • केतन के पिता फास्ट-ट्रैक सुनवाई और फांसी की मांग PM तक पहुंचा चुके हैं

अगला बड़ा पड़ाव: चार्जशीट

कानूनन गिरफ्तारी से 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है — यानी आने वाले हफ्तों (करीब सितंबर तक) में पुलिस को अदालत में आरोप-पत्र पेश करना होगा। यही चार्जशीट तय करेगी कि पुलिस किन सबूतों के दम पर हत्या का केस अदालत में लड़ेगी, और तभी केस का ट्रायल आगे बढ़ेगा। तब तक दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

(मामला अदालत में विचाराधीन है। सभी दावे पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं; कोई भी आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है।)

Sources: Patrika | AajTak — Siya Goyal

By Nilesh

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