पुणे. लोहागढ़ किले पर कारोबारी केतन अग्रवाल (25) की मौत के मामले में जांच से जुड़ा एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस जांच में संकेत मिले हैं कि 18 जून की कथित वारदात से पहले केतन को रास्ते से हटाने के कई कथित प्लान बन चुके थे — और फेल हुए थे**।
रिपोर्ट्स में दावा: पहले क्या-क्या कथित प्लान बने
रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच में जो कथित नाकाम योजनाएं सामने आई हैं:
- स्लो पॉइजन देने की कथित योजना — जो अमल में नहीं आ सकी
- सुपारी (contract killing) का कथित प्लान — जो भी परवान नहीं चढ़ा
- इसके बाद कथित तौर पर लोहागढ़ ट्रेकिंग का प्लान बना — जहां पुलिस के मुताबिक सिया के कोड इशारे (‘जैसे ही मैं नीचे बैठूंगी…’) पर चेतन ने केतन को खाई में धक्का दिया; यह क्रम पुलिस की क्राइम-सीन रीक्रिएशन में दोहराया गया था
पुलिस पहले ही दावा कर चुकी है कि साजिश करीब 7 महीने से चल रही थी। इन नए दावों की आधिकारिक पुष्टि चार्जशीट में ही होगी।
पुलिस की असली चुनौती: ‘सोनम रघुवंशी वाली’ जमानत का खतरा
इसी बीच पुणे ग्रामीण पुलिस के सामने बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- केस में कोई चश्मदीद गवाह नहीं और वारदात का सीधा वीडियो फुटेज भी नहीं
- ऐसे में पूरा दारोमदार डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों (कोड चैट, लोकेशन डेटा, फोन रिकॉर्ड) पर है
- कानूनी जानकारों को आशंका है कि कमजोर सीधे सबूतों की स्थिति में सिया को सोनम रघुवंशी केस की तरह जमानत मिल सकती है — मेघालय के उस चर्चित केस में आरोपी पत्नी की जमानत बरकरार रही थी
- इसीलिए पुलिस चार्जशीट बेहद सावधानी से तैयार कर रही है — हर डिजिटल कड़ी को अदालत में टिकाऊ बनाने की कोशिश
आगे क्या
दोनों आरोपी 17 जुलाई को बढ़ी न्यायिक हिरासत के तहत जुलाई-अंत तक यरवडा जेल में हैं। अब दो मोर्चों पर नजर — पुलिस की चार्जशीट (90-दिन की समयसीमा के भीतर) और बचाव पक्ष की संभावित जमानत अर्जी। केतन के पिता फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग PM तक पहुंचा चुके हैं।
(मामला अदालत में विचाराधीन है। सभी दावे पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं; कोई भी आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है।)
Sources: Navbharat Live | Patrika

