पुणे. लोहागढ़ किले पर कारोबारी केतन अग्रवाल (25) की मौत के मामले में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मियाद गुरुवार 16 जुलाई को पूरी हो गई। ऐसे मामलों में नियम के तहत आरोपियों को अदालत के सामने पेश कर हिरासत बढ़ाने की कार्यवाही होती है — गुरुवार की पेशी का आधिकारिक ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। इस बीच केस की चर्चा अब एक बड़े सवाल पर केंद्रित हो गई है: क्या पुलिस के पास कोर्ट में टिकने वाला सीधा सबूत है?
मराठी मीडिया रिपोर्ट का दावा — ‘वो’ सबूत अब तक नहीं
मराठी न्यूज पोर्टल सरकारनामा की एक हालिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पुलिस के पास अदालत में टिक सके ऐसा कोई एक भी ठोस और प्रत्यक्ष (direct) सबूत अब तक नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक अभियोजन को हत्या साबित करने के लिए फोन रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, लोकेशन डेटा और फॉरेंसिक जांच की पूरी कड़ी (chain of evidence) अदालत में जोड़नी होगी — वरना ‘हादसा या आत्महत्या नहीं, हत्या ही हुई’ यह स्थापित करना मुश्किल हो सकता है।
गौरतलब है कि बचाव पक्ष के वकील पहले ही कह चुके हैं कि केस में न कोई चश्मदीद है, न ठोस सबूत — पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिका है।
पुलिस का पलड़ा: कोड चैट, दूसरा मोबाइल, गवाह
दूसरी ओर पुलिस अपने दावे पर कायम है। SP संदीप सिंह गिल के मुताबिक जांच में कोड भाषा वाली चैट, सिया का दूसरा मोबाइल, अहम गवाह और फॉरेंसिक साक्ष्य मिले हैं, जो पुलिस थ्योरी के मुताबिक कथित सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करते हैं। पुलिस दावा कर चुकी है कि साजिश करीब 7 महीने से चल रही थी।
अब आगे क्या: चार्जशीट की घड़ी
- कानूनन गिरफ्तारी से 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है — जांच का हर हफ्ता अब कीमती है
- चार्जशीट में ही साफ होगा कि पुलिस किन सबूतों के दम पर हत्या का केस अदालत में लड़ेगी
- हिरासत अवधि के हर विस्तार के साथ आरोपियों की ओर से जमानत अर्जी की संभावना भी बढ़ती जाएगी
(मामला अदालत में विचाराधीन है। सबूतों संबंधी दावे मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस के बयानों पर आधारित हैं; दोष सिद्ध होना बाकी है।)
Sources: Sarkarnama | TV9 Hindi

