श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर).** जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ विधायकों की बगावत अब और गहरी हो गई है। कुछ दिन पहले तक जो आंकड़ा 19 असंतुष्ट विधायकों का था, वह अब बढ़कर 25 हो गया है — और इस बार मामला सिर्फ मांग तक सीमित नहीं, सीधे 14 दिन के अल्टीमेटम तक पहुंच गया है।
क्या हैं बागी विधायकों की मांगें
25 बागी विधायकों ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
1. कैबिनेट का पूरा फेरबदल — मौजूदा सभी मंत्रियों और CM के सलाहकारों को हटाया जाए
2. पारदर्शी मंत्रिमंडल गठन — पूरी पार्टी की चर्चा और योग्यता के आधार पर नई टीम बने
3. धारा 370 और 35A की बहाली — अगस्त 2019 में हटाई गई इन धाराओं को वापस लाने के लिए मजबूती से आवाज उठाई जाए
4. फैसलों में भागीदारी — चुनिंदा गुटों के एकतरफा फैसलों पर रोक लगे
नहीं माने तो क्या होगा
विधायकों ने चेतावनी दी है कि अगर 14 दिन के भीतर मांगें नहीं मानी गईं, तो वे राजभवन (गवर्नर हाउस) तक मार्च करेंगे और सरकार से अपना समर्थन औपचारिक रूप से वापस ले लेंगे। 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुल 41 विधायक हैं — अगर 25 विधायक समर्थन वापस लेते हैं, तो सरकार के लिए बहुमत बचाना मुश्किल हो जाएगा।
बढ़ती मुश्किलें
इसी बीच सांसद आगा सैय्यद रूहुल्लाह मेहदी ने भी 3 नवंबर को पार्टी और संसद दोनों से इस्तीफा देने का एलान किया है, जिसमें उन्होंने संवैधानिक मुद्दों पर पार्टी की “कमजोर पड़ती प्रतिबद्धता” का हवाला दिया है। इससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
आगे क्या
फिलहाल CM उमर अब्दुल्ला या पार्टी नेतृत्व की तरफ से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अगले 14 दिन जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
Source: Aaj Tak

