जयपुर। राजस्थान के 302 नगरीय निकायों में महापौर, अध्यक्ष और चेयरमैन पद के लिए कल हुए मतदान के नतीजे सामने आ गए हैं। राज्यभर में भाजपा ने करीब 198 निकायों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 94 निकायों में सफलता** मिली। बाकी सीटों पर निर्दलीय और अन्य दलों का कब्जा रहा।
अजमेर — निर्दलीयों ने निभाई निर्णायक भूमिका
वोटिंग से पहले चर्चा में रहा अजमेर, जहां 11 निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में थे, नतीजों में भी इसी क्रॉस-वोटिंग और गठजोड़ की सियासत का असर दिखा। दोनों प्रमुख दलों को यहां निर्दलीयों का समर्थन जुटाने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी।
बीकानेर कांग्रेस के खाते में
राज्य में जहां ज्यादातर बड़े शहरों में भाजपा का दबदबा रहा, वहीं बीकानेर नगर निगम कांग्रेस के खाते में गया — यह कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण जीत मानी जा रही है।
जोधपुर की रोमांचक जंग
वार्ड चुनावों में भाजपा-कांग्रेस के बीच 44-44 सीटों की बराबरी के बाद जोधपुर में महापौर पद की लड़ाई सबसे ज्यादा दिलचस्प रही। अंतिम नतीजे में निर्दलीयों के समर्थन ने ही तस्वीर साफ की।
भजनलाल सरकार के लिए क्या मायने
यह नतीजे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के लिए स्थानीय स्तर पर संगठन की मजबूती का प्रमाण माने जा रहे हैं। राज्यभर में तीन-चौथाई से ज्यादा निकायों पर भाजपा की जीत सरकार के जनाधार को मजबूत करती है, वहीं बीकानेर जैसी जीत कांग्रेस के लिए राहत का सबब बनी है।
आगे क्या
अब सभी निर्वाचित निकायों में महापौर और अध्यक्ष पद के लिए औपचारिक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी। जोधपुर और अजमेर जैसे शहरों में गठबंधन को लेकर आगे की सियासी हलचल जारी रहने की उम्मीद है।

