नई दिल्ली.** चुनाव आयोग (EC) को लेकर चल रहा विपक्ष का “वोट चोरी” विरोध अभियान गुरुवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया। 8 अक्टूबर को हुई लगातार दूसरी बैठक में INDIA गठबंधन के सांसदों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जारी रखने का फैसला किया और राजघाट तक मार्च करने की योजना बनाई। यह मार्च लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में निकला।
विपक्षी नेताओं का अल्टीमेटम
कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा, “हम पीछे नहीं हटेंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का अल्टीमेटम है कि ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त पद से इस्तीफा दें, और अगर वे इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं, तो सरकार उन्हें पद से हटाए। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “हम देश के संविधान को छीनने नहीं देंगे, हम हर हाल में संविधान बचाएंगे।”
पृष्ठभूमि — जंतर-मंतर पर रोक और FIR
यह दूसरी बैठक बुधवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दिल्ली पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद हुई, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
राष्ट्रपति भवन से अब भी जवाब का इंतजार
विपक्षी गठबंधन ने 2 अक्टूबर को ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखकर SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज पर चर्चा के लिए मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन राष्ट्रपति भवन से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक अगर राष्ट्रपति से मुलाकात नहीं होती, तो विपक्ष सेवा तीर्थ, राष्ट्रपति भवन, उप-राष्ट्रपति आवास और PM मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के आवासों के पास विरोध प्रदर्शन तेज कर सकता है।
आगे क्या
विपक्ष का यह आंदोलन चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे व्यापक “लोकतंत्र बचाओ” अभियान का हिस्सा है, जिसमें पहले ही राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जा चुका है और NHRC भी एक अलग मामले की जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और चुनाव आयोग की तरफ से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
Sources: TheNewsMill | India.com

