नई दिल्ली. भारत की डिजिटल और मैन्युफैक्चरिंग ताकत का एक बड़ा प्रमाण सामने आया है — स्मार्टफोन अब भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद (single largest export item) बन चुका है। 2025 में भारत ने ₹2.62 लाख करोड़ के स्मार्टफोन निर्यात** किए, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी Apple (iPhone) की रही — जिसे Foxconn, Tata Electronics और Pegatron जैसी कंपनियां भारत में बनाती हैं। दस साल पहले जो उत्पाद भारत के टॉप-100 निर्यात में भी नहीं था, वह आज नंबर-1 पर है।
नई ₹62,500 करोड़ की स्कीम: असेंबली से आगे की छलांग
इसी गति को और तेज करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने इसी महीने (15 जुलाई) एक नई ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दी है, जो पहले की PLI स्कीम (31 मार्च 2026 को समाप्त) की जगह लेगी। इसका मकसद है:
- सिर्फ असेंबली से आगे बढ़कर भारत में ही फोन डिजाइन करना और स्वदेशी ब्रांड बनाना
- घरेलू कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को गहरा करना और स्वदेशी तकनीक/IP विकसित करना
- नए निवेश आकर्षित करना और हजारों नौकरियां पैदा करना
- वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में भारत की स्थिति और मजबूत करना
पांच साल का रोडमैप
यह स्कीम FY 2026-27 से FY 2030-31 तक पांच साल चलेगी। इसका फोकस भारत को दुनिया का बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने और निर्यात को नई ऊंचाई देने पर है। जानकारों के मुताबिक यह भारत के लिए ‘मेक इन इंडिया’ से ‘डिजाइन इन इंडिया’ की ओर बड़ा कदम है।
बड़ी तस्वीर: आत्मनिर्भर टेक इकोनॉमी
हाल के हफ्तों में भारत ने टेक और रक्षा दोनों में स्वदेशी क्षमता तेजी से बढ़ाई है — निजी कंपनी Skyroot के Vikram-1 रॉकेट और DRDO के ‘कुशा’ मिसाइल से लेकर अब मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तक। स्मार्टफोन का नंबर-1 निर्यात बनना और नई स्कीम का आना दिखाता है कि भारत की टेक-इकोनॉमी अब असेंबली लाइन से आगे बढ़कर इनोवेशन और ब्रांड-निर्माण की दिशा में बढ़ रही है। अगर स्वदेशी ब्रांड और कंपोनेंट इकोसिस्टम खड़ा होता है, तो यह रोजगार, निर्यात और तकनीकी आत्मनिर्भरता — तीनों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगा।
Sources: Business Today | India TV

