काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ त्रासदी में मृतकों की संख्या अब 750 से ज्यादा हो चुकी है, जबकि 3000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस बीच बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन से बनी एक नई ‘बैरियर लेक’** (मलबे से बनी अस्थायी झील) के उफनने से बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा, हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
बैरियर लेक ने बढ़ाई थी नई चिंता
त्रिशूली नदी के किनारे भूस्खलन से बनी यह बैरियर लेक 28 अगस्त को उफनने लगी थी, जिसके बाद चीनी और नेपाली अधिकारियों ने एहतियातन बचाव अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया था और नई बाढ़ की चेतावनी जारी की थी। तिब्बत में हुई एक क्षेत्रीय प्रेस वार्ता में चीनी अधिकारियों ने बताया कि **”बैरियर लेक से पानी निकलना शुरू हो चुका है, और फिलहाल स्थिति स्थिर है — झील के पूरी तरह टूटने की आशंका अपेक्षाकृत कम है।”
29 अगस्त तक झील का पानी काफी हद तक निकल चुका था और झील के तल का हिस्सा साफ नजर आने लगा था, जिससे बचाव टीमों को राहत मिली।
तबाही का दायरा
26 अगस्त की सुबह त्रिशूली नदी के करीब 72 किलोमीटर के दायरे में आई फ्लैश फ्लड और मलबे ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी और चितवन जिलों के दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में लिया था। इनमें से कई क्षेत्र आज भी दुर्गम बने हुए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
आगे की चुनौती
बचावकर्मी हेलीकॉप्टरों के जरिए दुर्गम इलाकों तक पहुंचने की कोशिश जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार जैसे-जैसे तलाशी अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन से जुड़े लापता सदस्यों के समूह को लेकर भी अब तक कोई निर्णायक जानकारी सामने नहीं आई है, और उनके परिजन बेसब्री से खबर का इंतजार कर रहे हैं।
Sources: Al Jazeera | Kathmandu Post

