इस्लामाबाद.** पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। 12 अक्टूबर से शुरू हुई झड़पें कई स्थानों पर जारी हैं, और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं। अक्टूबर में हुई इन झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है, जिसे 2021 में तालिबान की अफगानिस्तान में वापसी के बाद सीमा पर सबसे भीषण हिंसा बताया जा रहा है।
17 अक्टूबर की बड़ी झड़प
17 अक्टूबर को पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले और सीमा पार अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत के दांद पतन व जाजी आर्योब जिलों में करीब 4 घंटे तक गोलाबारी हुई। इस झड़प में दोनों पक्षों ने भारी हथियारों, यहां तक कि पाकिस्तानी तोपखाने का भी इस्तेमाल किया।
हताहतों के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग बताए गए हैं — अफगान मीडिया के मुताबिक 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 6 अन्य जख्मी हुए, जबकि पाकिस्तान से जुड़े मीडिया का दावा है कि कई तालिबान सीमा चौकियां तबाह की गईं और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 13 लड़ाके मारे गए।
तनाव की जड़
यह ताजा संघर्ष 18 सितंबर को उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में हुए एक आत्मघाती हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें 31 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा जख्मी हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इत्तेहाद उल मुजाहिदीन पाकिस्तान (IMP) नामक आतंकी गठबंधन ने ली थी। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान सरकार IMP, TTP और अन्य आतंकी संगठनों को पनाह दे रही है, जिसके चलते पाकिस्तान में हमले हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
रूस और यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने काबुल और इस्लामाबाद का दौरा कर दोनों पक्षों से बातचीत और तनाव कम करने की अपील की है। हालांकि जमीन पर अब तक कोई ठोस संघर्ष-विराम नहीं हो सका है।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पूर्व सहयोगियों के बीच यह तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। भारत के लिए भी यह स्थिति अहम है क्योंकि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर अस्थिरता का असर पूरे दक्षिण-एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
Sources: Tribune India | News4JAX

