नई दिल्ली/भुवनेश्वर. भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता में एक बड़ा मुकाम जुड़ गया है। DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने ‘कुशा’ लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल का सफल पहला उड़ान परीक्षण ओडिशा तट के पास एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप** से किया। यह परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक टारगेट के खिलाफ हुआ, जो तेज रफ्तार और ऊंचाई पर उड़ते हवाई खतरे की नकल कर रहा था — और मिसाइल ने उसे सफलतापूर्वक मार गिराया।
क्या है ‘कुशा’ की खासियत
‘कुशा’ एक लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जो कई तरह के हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है:
- लड़ाकू विमान (fighter jets)
- दुश्मन की मिसाइलें
- ड्रोन (UAVs)
- बड़े दुश्मन विमान
यह एक विस्तृत रेंज और ऊंचाई के दायरे में इन खतरों को निशाना बना सकती है। मिसाइल, रडार, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर समेत इसके सभी हिस्से DRDO की प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग साझेदारों ने मिलकर विकसित किए हैं — यानी पूरी तरह स्वदेशी।
S-400 पर निर्भरता घटेगी
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ‘कुशा’ के आने से भारत की रूसी S-400 वायु रक्षा प्रणाली पर निर्भरता कम होगी। अभी तक लंबी दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल क्षमता दुनिया के गिने-चुने तकनीकी रूप से उन्नत देशों के पास ही है — अब भारत भी इस क्लब में शामिल होने की राह पर है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षमता चंद अग्रणी देशों के पास ही है, और यह भारत की स्वदेशी रक्षा ताकत का बड़ा प्रमाण है।
मेक इन इंडिया को बढ़ावा
‘कुशा’ का सफल परीक्षण आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी है। हाल के महीनों में भारत ने रक्षा और अंतरिक्ष दोनों क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमता को तेजी से बढ़ाया है — निजी कंपनी Skyroot के Vikram-1 रॉकेट से लेकर अब DRDO की इस वायु रक्षा प्रणाली तक। पूरी तरह तैनाती के बाद ‘कुशा’ भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा करेगी और सीमाओं की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी।
Sources: Republic World | News on AIR | Defence Security Asia

