बीजिंग/नई दिल्ली. भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों को आधिकारिक नाम देने पर चीन बौखला गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत के इस कदम को ‘अवैध, अमान्य और शून्य’ (illegal, null and void) करार दिया है। गौरतलब है कि भारत ने 7 अगस्त को Survey of India के आधिकारिक नक्शों पर अरुणाचल के 27 स्थानों** — जिनमें भू-भाग, पहाड़ी दर्रे, एक झील और एक स्मारक शामिल हैं — को उनके मानक नामों से चिह्नित किया था। यह कदम खुद चीन की बार-बार नाम बदलने की चालों का जवाब था।
चीन ने क्या कहा
- चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बयान दिया
- उन्होंने कहा कि “भारत का चीन द्वारा लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे नामों को अपने तथाकथित ‘मानक नामों’ से बदलने का प्रयास अवैध है”
- चीन ने दावा किया कि इससे “जांगनान क्षेत्र के चीन का हिस्सा होने का तथ्य नहीं बदलेगा”
- चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ और तिब्बत को ‘शिजांग’ कहता है
भारत का रुख: अरुणाचल हमारा अभिन्न अंग
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। भारत का कहना है कि सिर्फ नाम गढ़ देने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। बीते सालों में चीन कई बार अरुणाचल के स्थानों की अपनी ‘मानक नाम’ सूचियां जारी कर चुका है (2017 में 6, 2021 में 15, 2023 में 11 नाम), जिन्हें भारत हर बार खारिज करता रहा है।
बड़ी तस्वीर
भारत का अपने ही क्षेत्र के स्थानों को आधिकारिक नाम देना और चीन की आपत्ति को दरकिनार करना, नई दिल्ली की मजबूत और सक्रिय नीति को दर्शाता है। सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ यह कूटनीतिक कदम भारत की संप्रभुता को और पुख्ता करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की आपत्तियों के बावजूद भारत अपने रुख पर अडिग है।
(यह रिपोर्ट आधिकारिक बयानों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)
Sources: India Today NE | The Bridge Chronicle

